कारगिल विजय के 25वें साल के उपलक्ष्य में सेना शहीदों की याद में मोटरसाइकिल से उत्तर पूर्वी राज्यों से लेकर लद्दाख तक यात्रा निकालेगी। यह यात्रा नगालैंड की राजधानी कोहिमा से शुरू होगी और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कारगिल युद्ध स्मारक तक पहुंचेगी।
रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि अभियान 3 से 26 जुलाई तक चलेगा और इस दौरान मोटरसाइकिलों से 3,700 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। इस दौरान युद्ध के मैदान से एकत्रित की गई उनके बलिदान से सींची गई पवित्र मिट्टी को उनके घर पर परिजनों को सौंपा जाएगा।
26 को विजय दिवस पर कोहिमा से शुरु होगा अभियान बहादुर मशकोह योद्धाओं के नेतृत्व में अभियान को पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ कोहिमा से हरी झंडी दिखाएंगे। यह अभियान अपनी तरह का पहला अभियान है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र के दो छोरों यानी पूर्वोत्तर को लद्दाख से जोड़ना है।
यह आयोजन पूर्वोत्तर क्षेत्र के बहादुर सैनिकों को भी श्रद्धांजलि होगा, जिन्होंने लद्दाख की बर्फीली सीमाओं में बहादुरी से लड़ाई लड़ी और सर्वोच्च बलिदान दिया। टीम राष्ट्र निर्माण, युवाओं को प्रेरित करने के साथ-साथ हमारे पूर्व सैनिकों और वीर नारियों की शिकायतों को दूर करने में सेना की भूमिका पर प्रकाश डालने वाले समाज के वर्गों के साथ भी बातचीत करेगी।
कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की जीत की याद में और शहीद हुए नायकों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स की लद्दाख स्काउट्स बटालियन ने फयांग, लेह से हुंदर डॉक, प्रताप पुर तक एक ट्रेकिंग अभियान भी चलाया।
16 सदस्यों वाले दल ने तीन दिन में चुनौतीपूर्ण इलाके में लगभग 18,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुर्जेय लेसरमो ला को पार करते हुए 42 किलोमीटर की दूरी तय की। एजेंसी
सेना का काफिला कई मनमोहक और चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों से गुजरेगा
इस आयोजन की शुरुआत द्रास के युद्ध के मैदानों की में वीर सैनिकों की चरण धूल के संग्रह से हुई है। इस पवित्र माटी को आठ राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में उन शहीद सैनिकों के परिवारों को उनके गृह नगरों में भेंट किया जाएगा।
प्रवक्ता ने कहा, 20 जून को ब्रिगेडियर डीके बडोला (सेवानिवृत्त) और लेह स्थित फायर एंड फ्यूरी कोर की परशु ब्रिगेड के सैन्य अधिकारियों ने पवित्र मिट्टी संग्रह किया।