दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले का एक बुज़ुर्ग दम्पति के पास पहुंची सेना। दम्पति का दुख दर्द किया सांझा और मदद का दिलाया पूरा आश्वासन। सेना के इस प्रयास से दंपत्ति सहित रिश्तेदारों ने खुशी जताई।
पुलवामा के सिथरगुंड इलाके का एक बुजुर्ग दम्पति आज भी अपने गुमराह हुए बेटे के इंतजार में बैठा है। उनका गुजर बसर काफी मुश्किल हो चुका है और उनके रिश्तेदार ही उनकी देख रेख कर रहे हैं। उनका बेटा रियाज़ अहमद डार लश्कर का आतंकी है और पिछले तीन सालों से सक्रीय है। रियाज़ का पिता पेरालिसिस का मरीज है और मां भी बुजुर्ग अवस्था में है, जिनका पिछले 4 महीने से देखरेख अब उनके रिश्तेदार कर रहे हैं।
वहीं अब ईद-उल-अजहा के मौके पर सेना ने एक इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए बुज़ुर्ग दम्पति के पास पहुंचे। सेना के काकपुरा कैंप से जवान उनके पास गए और उनसे उनका दर्द सांझा किया। जिससे दम्पति के चेहरे पर खुशी सी लौट आई।
इतना ही नहीं उनके रिश्तेदार जो उनकी देख रेख करते हैं भी सेना के इस प्रयास से खुश हुए और सेना के इस प्रयास की सरहाना की। बता दें कि सेना के इस प्रयास से न सिर्फ उनके चेहरों पर रौनक लौट आई बल्कि बेटे के वापिस लौटने की भी उम्मीद जागी।