राजोरी की नौशेरा तहसील में सेना द्वारा काबिज जमीन का मुआवजा किसानों को नहीं मिलने का मामला विधान परिषद में उठाया गया।
प्रश्नकाल के दौरान सदस्य डा. शहनाज गनई ने सरकार का ध्यान इस ओर खींचते हुए आरोप लगाया कि इलाके में एक माफिया गिरोह के सक्रिय होने के कारण यह पैसा चंद लोगों की जेबों को गर्म कर रहा है।
इसका जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री सज्जाद किचलू ने कुल 10,200 कनाल और सात मरले किसानों की भूमि सेना के अधीन होने की जानकारी सदन को दी।
एक आदमी के पास 300 खसरा नंबर
किचलू ने बताया कि मामला यहां तक पहुंच गया है कि गुलाम कश्मीर के कब्जे में जा चुके कुछ खसरा नंबरों का भी यह लोग मुआवजा हासिल करने में सफल हो रहे हैं। इनमें से एक व्यक्ति के पास ही 300 से अधिक खसरा नंबर है, जिसने इनको आगे बेच दिया है।
इनकी जेबों में तो सरकारी खजाने का पैसा जा रहा, लेकिन जमीन के सही मालिकों को कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है। एक व्यक्ति द्वारा आरटीआई डालने के बाद जो जानकारी राजोरी प्रशासन द्वारा उपलब्ध करवाई गई थी, उसमें साफ बताया गया है कि सेना के अधीन जमीन का मालिक कोई दूसरा है और उसका खसरा नंबर किसी के पास है।
जानिए, सेना के पास कितनी जमीन
सरकार की ओर से इसका उत्तर गृह राज्य मंत्री ने देते हुए कहा गया कि राजोरी जिले की नौशेरा तहसील में कुल 10,200 कनाल 7 मरले जमीन सेना के कब्जे में है। इसमें 2071 कनाल भूमि सुंदरबनी में जबकि 8129 और 7 मरले नौशेरा में है।
सेना द्वारा 1,45,53,656 रुपये किराए के तौर पर प्रति वर्ष किसानों को दिए जा रहे हैं। 1,07,99,700 रुपये नौशेरा में जबकि 37,53,956 रुपये सुंदरबनी में किराए के तौर पर किसानों को मिल रहे हैं।