फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांपोर हमला: सेना की रणनीति के तहत 58 घंटे तक EDI इमारत में चला ऑपरेशन

Wed, 12 Oct 2016 04:39 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
विज्ञापन
POMPORE - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
पांपोर में सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ अब खत्म हो गई है । सोमवार को सुबह 7 बजे से EDI की इमारत में चल रही मुठभेड़ करीब 58 घंटे की कार्रवाई के बाद खत्म हुई । इस दौरान सेना के जवानों ने 2 आतंकियों को मार गिराया ।
विज्ञापन


इस पूरे ऑपरेशन के खत्म हो जाने के बाद सेना के विक्टर फोर्स के जेओसी मेजर जनरल अशोक नरूला ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि सोमवार से आतंकियों से चल रही मुठभेड़ बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे खत्म हुई । मेजर जनरल अशोक नरूला के मुताबिक जेकेइडीआई के 7 मंजिल के होने के वजह से सेना के लिए ये एक मुश्किल आपरेशन था । मेजर जनरल नरूला के मुताबिक सात मंजिलों की इस इमारत में 60 कमरे और 60 बाथरूम हैं ।

इस कारण सेना के जवानों की जान को कोई नुकसान न होने देने के नजरिए से सेना के अधिकारियों ने कार्रवाई को खत्म करने में कोई जल्दबाजी नहीं की । सेना के जवानों ने लगातार फायरिंग करते हुए सबसे पहले उन खिड़कियों को तोड़ा जिससे इमारत के अंदर की हलचल साफ साफ बाहर से दिख सके । इसके बाद सेना के जवानों ने आतंकियों को ढेर करने के लिए कार्रवाई शुरू की । 
विज्ञापन

सेना नें ऑपरेशन में दो आतंकियों को मार गिराया

EDI इमारत में आपरेशन - फोटो : Amar Ujala
मेजर जनरल अशोक नरूला के मुताबिक सेना के पास बारामुला में हमले के बाद से ही किसी बड़े हमले की आशंका का अलर्ट मौजूद था । इस अलर्ट के बाद से ही सेना के जवान पूरी तरह से चौकन्ने थे। सेना चाहती थी कि EDI इमारत में पिछली बार के हमले की तरह इस बार किसी भी जवान की जान न जाए । 

सेना के जवानों ने इसी एहतियात के कारण ऑपरेशन को पूरा करने में कोई जल्दबाजी नहीं की । सेना के जवानों ने इस पूरे ऑपरेशन में दो आतंकियों को मार गिराया है । इन दोनों आतंकियों के पास से सेना को 2 राइफले बरामद हुई हैं । हालांकि इमारत में अब भी सेना का सर्च आपरेशन जारी है । 
विज्ञापन

रणनीति की तहत लंबी चली मुठभेड़

EDI इमारत में आपरेशन - फोटो : PTI
मेजर जनरल अशोक नरूला ने बताया कि सेना का ऑपरेशन अब पूरा हो चुका है । इस पूरे ऑपरेशन के दौरान IED बमों और राकेट लांचर का भी इस्तेमाल किया गया था । इन हथियारों का इस्तेमाल इमारत के बाहरी क्षेत्र में मौजूद खिड़कियों और दरवाजों को तोड़ने के लिए हुआ था । 

सेना के मुताबिक पिछली बार हुए हमले के दौरान सेना के जवान इस इमारत में दाखिल हुए थे जिसके बाद आतंकियों से मुठभेड़ में 7 जवान शहीद हो गए थे । इस बार सेना के जवानों की जान को कोई नुकसान न होने देने के उद्देश्य से पूरी तैयारी से इमारत के बाहर रहकर ही ऑपरेशन को अंजाम दिया गया । 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें