कश्मीर घाटी में आतंकवाद की बदलती तस्वीर का सामना करने के लिए सेना को आतंकवाद और घुसपैठ विरोधी अपनी रणनीति की समीक्षा करने को मजबूर किया है। खासकर आतंकी संगठनों के प्रति युवाओं, खासकर पढ़े लिखे लोगों का झुकाव चिंता का विषय बन गया है।
इसके अलावा सीमा पार से फिर आतंकी घुसपैठ के प्रयासों को रोकने के लिए सेना ने नया दृष्टिकोण अपनाया है। इस साल लगभग 50 युवाओं के आतंकी संगठनों से जुड़ने की सूचनाओं पर 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा ने कहा, ‘मैं संख्या पर नहीं जाना चाहता।
यदि कोई भी युवा आतंकी संगठन से जुड़ता है, वह मेरे लिए चिंता का विषय है। खासकर यदि शिक्षित युवक जुड़ता है तो वह हम सभी के लिए चिंता का विषय है।’ आरोपों के खेल में जाने की बजाय लेफ्टिनेंट जनरल साहा ने कहा कि यह चिंता की बात है और उस पर ध्यान देना होगा।