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पीओके और अक्साई चीन वापस लेने पर राजनीतिक नेतृत्व करे फैसला, सेना तैयार- बिपिन रावत

Sat, 27 Jul 2019 02:56 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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General Bipin Rawat - फोटो : ANI
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1947 में जम्मू-कश्मीर भारत का अंग बना। इसके बाद यहां सेना पहुंची। भारत का राज्य पर पूरा अधिकार है। अब हमें कैसे अक्साई चीन और पीओके वापस लेना है, यह फैसला राजनीतिक नेतृत्व को लेना है। सेना किसी भी आदेश का पालन करने को तैयार है। पीओके और अक्साई चीन का जो हिस्सा हमारे नियंत्रण में नहीं है, उसको लेकर देश के राजनीतिक नेतृत्व को तय करना है कि उसे कैसे हासिल किया जाए। इसके लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाना है या फिर कोई और रास्ता अपनाना है, यह सरकार को तय करना है। यह कहना है सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का। ये बातें उन्होंने द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद अपने संबोधन में कही। उनके साथ एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ व नौ सेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह भी मौजूद थे, तीनों सेना प्रमुख ने शहीदों को याद किया।

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बंदूक उठाने वालों से बंदूक कर दिया जाएगा अलग
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि कश्मीर में बंदूक और युवा एक साथ नहीं चल सकते हैं। जो भी कश्मीर में सेना के खिलाफ बंदूक उठाएगा वो कब्र में जाएगा और उसकी बंदूक हमारे पास आएगी। हालांकि, ये एक मात्र हल नहीं है। हमारी कोशिश है कि यहां का युवा रोजगार की तरफ आगे बढ़े। अपने सुनहरे भविष्य का रास्ता अपनाए। अब भी सेना दिग्भ्रमित युवाओं तक पहुंचने का प्रयास कर रही है ताकि वह आतंक का रास्ता छोड़ दे। इसके लिए समाज की मदद ली जा रही है। समाज के संभ्रांत लोगों, मौलवियों से बात की जा रही है। 

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तीनों सेना प्रमुख ने द्रास में दी श्रद्धांजलि

तीनों सेना प्रमुख ने शुक्रवार को द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक पर कारगिल शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ व नौ सेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने शहीदों को याद किया। इसके साथ ही दिल्ली से शुरू हुई विजय मशाल को युद्ध स्मारक पर समर्पित किया। 

युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उन्होंने कहा कि इन वीर शहीदों की वजह से दुश्मनों को मुंह की खानी पड़ी। सेना अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही सेना इन वीर शहीदों के परिवार के साथ सुख-दुख की घड़ी में पूरी तरह खड़ी है। 20 वीं वर्षगांठ पर दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से शुरू विजय मशाल के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक पहुंचने पर सेना प्रमुख ने उसे हासिल किया। 

साथ ही उसे वहां प्रज्ज्वलित मशाल के साथ शामिल किया। रक्षा मंत्री ने 14 जुलाई को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर सेना के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज सूबेदार जीतू राय को विजय मशाल सौंपी थी। यह उत्तर भारत के 9 प्रमुख कस्बों व शहरों की 1000 किलोमीटर यात्रा कर शुक्रवार को द्रास स्थित कारगिल में शहीदों की कर्मभूमि पर पहुंचीं। इससे पहले 20 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने द्रास में कारगिल वार मेमोरियल पहुंचकर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए थे। 

सेना प्रमुखों ने कारगिल युद्ध स्मारक का दौरा करने के साथ ही वहां पहुंची वीर नारियों तथा सेक्टर में तैनात जवानों के साथ संवाद किया। उन्होंने जवानों का हौसला बढ़ाया। साथ ही वीर नारियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। 

वीपी मलिक भी रहे मौजूद
द्रास में आयोजित समारोह में जनरल वीपी मलिक (सेवानिवृत्त), जो कारगिल संघर्ष के दौरान सेना प्रमुख रहे थे, भी उपस्थित रहे। इसके साथ ही सेना के कई अन्य अधिकारी भी वहां मौजूद रहे। 
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