आल पार्टीज सिख कोर्डिनेशन कमेटी (एपीएससीसी) ने बुधवार को राज्यपाल एनएन वोहरा की अध्यक्षता वाले राज्य प्रशासन से गुहार लगाई कि वह जाट समुदाय और पटेल समुदाय की मांगों के संबंध में हाल ही में लिए गए निर्णय से प्रेरणा लें।
ताकि जम्मू-कश्मीर के सिखों को भी अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त हो, जो कई वर्षों से लंबित है। उन्होंने कहा कि मांगें नहीं माने जाने पर राज्य में आंदोलन छेड़ा जाएगा।
एपीएससीसी के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने जारी बयान में कहा है कि जाट और पटेल समुदायों द्वारा रखी गई मांगों के बारे में लिए गए निर्णय से राज्य प्रशासन की आंखें खुलनी चाहिए और उन्हें उनका संज्ञान लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल की अध्यक्षता वाले राज्य प्रशासन को राज्य के सिखों को अल्पसंख्यक का दर्जा देना चाहिए। रैना ने यह भी कहा कि जाट और पटेल समुदायों द्वारा मांगों को मनवाने के लिए छेड़े गए आंदोलन को भी राज्य प्रशासन को ध्यान में रखना होगा।
उन्होंने राज्यपाल द्वारा सार्वजनिक मुद्दों को गंभीरता से सुलझाने पर उनकी सराहना की और कहा कि जिस प्रकार वह अन्य मुद्दों को गंभीरता से ले रहे हैं उसी प्रकार से राज्य के सिखों की मांग को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और उस समय के राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आश्वासन दिया था। लेकिन, पूरा नहीं किया। पीडीपी ने भी चुनाव मैनिफेस्टो में मुद्दे को शामिल किया था, लेकिन 10 महीने बीतने के बाद भी कुछ नहीं किया।