महबूबा मुफ्ती की सरकार में 2016 के दौरान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में नियुक्तियों के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। गृह विभाग और सीआईडी ने हाईकोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश कर इस घोटाले का पर्दाफाश किया है। पिछले दरवाजे से हुई नियुक्तियों में महबूबा के अंकल सरताज मदनी का बेटा शामिल बताया गया है।
उस समय रहे उपमुख्यमंत्री के पीआरओ तक का नाम इस घोटाले में शामिल है। जिसने चुने गए उम्मीदवारों में प्रत्येक से पांच-पांच लाख रुपये लिए। इस खुलासे के बाद हाईकोर्ट ने मामले में किसी को अग्रिम राहत नहीं देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सरकार और बोर्ड को नोटिस जारी कर इसका जवाब मांगा है।
जस्टिस ताशी राबस्तन वाली खंडपीठ ने वीरवार को मामले पर सुनवाई की। इससे पहले कोर्ट में अपीलकर्ता की तरफ से एडवोकेट अभिनव शर्मा और सरकारी पक्ष के वकील असीम साहनी और अन्य में जमकर बहस हुई। शुभम थापा और अन्य ने कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
क्या है मामला
2016 में खादी ग्राम उद्योग बोर्ड (केवीआईबी) में 101 पदों पर अफसरों, कर्मियों की नियुक्तियां हुईं। बाद में पता चला कि इन नियुक्तियों में गड़बड़ी हुई है। सरकार ने इस मामले की जांच करने के लिए गृह विभाग के प्रधान सचिव आर के गोयल के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई। जांच कमेटी ने रिपोर्ट दी कि इसमें घोटाला हुआ है। सीआईडी के एडीजीपी ने भी रिपोर्ट दी कि घोटाला हुआ है। सरकार ने 2018 में इन नियुक्तियों को रद्द कर दिया। इसके बाद कुछ उम्मीदवार कोर्ट पहुंच गए।
मदनी के बेटे ने नहीं दी लिखित परीक्षा
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि नियुक्तियां पूरी तरह से अवैध थीं। एक सोची समझी प्लानिंग के साथ सबकुछ किया गया। नोटिस निकाला और भर्ती प्रक्रिया का जिम्मा एक निजी कंपनी को दे दिया गया। उम्मीदवारों को इंटरव्यू का समय नहीं दिया गया। 1.4 अनुपात के हिसाब से इंटरव्यू काल होने थे, लेकिन 1.15 के अनुपात से इंटरव्यू के लिए उम्मीदवार चुने गए। प्रभावशाली लोगों के सगे संबंधियों को नौकरी के लिए चुना गया। मदनी के बेटे आरोट मदनी ने इसके लिए लिखित परीक्षा तक नहीं दी। उसके स्थान पर किसी और ने परीक्षा दी। जो लोग चुने जाने थे, उनके लिए पहले से ही ग्राउंड तैयार था।
डिप्टी सीएमओ के पीआरओ ने मांगे पांच-पांच लाख
जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री के पीआरओ मुश्ताक अहमद मलिक ने उम्मीदवारों से संपर्क किया। उनकी नियुक्ति के लिए पांच-पांच लाख रुपये मांगे गए। इस समय मुश्ताक श्रीनगर में सरकारी खर्चे पर होटल में रह रहा है।
पूरी भर्ती प्रक्रिया में धांधली
भर्ती में नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया। उम्मीदवारों को तैयारी का समय नहीं दिया गया। जल्दबाजी में ही परिणाम घोषित किया गया। प्रक्रियाएं सिर्फ नाम की हुईं। चुने जाने वाले लोगों के नाम पहले से तय किए जा चुके थे।
उम्मीदवार सफाई देने में नाकाम
जज ने महसूस किया कि अपीलकर्ता (चुने गए उम्मीदवार) को कई बार कोर्ट में अपना पक्ष रखने का समय दिया गया। इनको वक्त दिया गया कि वह अपनी नियुक्तियों पर सफाई दें। साबित करें कि उनकी नियुक्ति अवैध नहीं। इनके वकील ने भी कोर्ट में कहा कि इनकी नियुक्ति में गड़बड़ी हो सकती है। लेकिन नियुक्तियां अवैध नहीं हैं। उम्मीदवार अपनी सफाई नहीं दे सके। गृह विभाग, जांच कमेटी और सीआईडी की रिपोर्ट कहती है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया में घोटाला हुआ है।
चार हफ्ते में मांगा जवाब
सरकारी पक्ष ने कोर्ट में कहा कि कुछ उम्मीदवार चाहते हैं कि इस मामले पर स्टे मिल जाए। लेकिन यह मामला बहुत हाई प्रोफाइल है। सरकार सभी नियुक्तियों को अप्रैल महीने में रद्द कर चुकी है। किसी को इसमें राहत नहीं मिलनी चाहिए। इस पर जज ने अपील को खारिज कर दिया। सरकार और केवीआईबी को नोटिस दिया। चार हफ्तों के भीतर इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है।