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अपराजिता:100 मिलियन स्माइल्स, बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहेंगी

Thu, 12 Sep 2019 11:51 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला की अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत बाल शिशु शिक्षा केंद्र हाई स्कूल कालूचक में पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने पेंसिल और रंगों से चित्रकारी करते हुए महिला की अपार शक्ति को दर्शाया। इस चित्रकारी द्वारा छात्राओं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बेटियों के साथ होने वाले कुछ अन्याय को अपनी कला से दर्शाया और साथ में यह संदेश देते हुए कहा कि बेटियां बेटों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
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अपराजिता के तहत अमर उजाला की तरफ से करवाई जाने वाली प्रतियोगिता में छात्राओं ने कहा कि आज के दौर में इस तरह की प्रतियोगिता का होना बहुत ही जरूरी है। उनका कहना था कि यह सरल उपाय है, जिससे लड़कियों को उनकी शक्ति का अहसास दिलाया जा सकता है। इस दौरान स्कूल की आशी खाने, पलक चलोत्रा, शीतल, भारती, रीया आदि ने हिस्सा लिया। अपनी पेंटिंग के जरिये महिला सशक्तीकरण से जुड़े कई अहम मुद्दों के बारे में छात्राओं ने बात की।
 

यह कदम बेटियों के लिए हितकारी रहेगा। इससे लड़कियों का उत्साह और हौसला बढ़ेगा। बेटे को बेटियों से बढ़कर समझा जाता है। इसी कारण गर्भ में ही कन्याओं की हत्या होती आ रही है। यह अच्छा तरीका है, जिससे बहुत ही खूबसूरती और सरलता से महिला सशक्तीकरण का मुद्दा उठाया जा सकता है। लोगों को जागरूक किया जा सकता है।- अंजू बक्शी, स्कूल की प्रधानाचार्य

 

एक शिक्षित महिला कई परिवारों को शिक्षा से जोड़ने का काम करती है। लड़की अगर पढ़ी लिखी होगी तो दो घरों में उजाला करेगी। नारी को अबला मत समझें। वह किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रह सकती। वह घर के चूल्हे-चौके से उठकर अंतरिक्ष तक का सफर तय कर सकती है। मैं चाहती हूं कि इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी हमारे स्कूल में हो।- पलक मिश्रा, छात्रा

 

बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है। अगर एक बेटी नहीं होगी तो बेटा कहां से आएगा। अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स मुहिम बेटियों को हक दिलवाने लोगों को जागरूक करने में मददगार साबित हो सकती है। हिंदू धर्म भी नारी को शक्ति का दर्जा देता है। मैं चाहती हूं कि इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी हमारे स्कूल में होते रहने चाहिए।- आशी खान, छात्रा 

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