यह कदम बेटियों के लिए हितकारी रहेगा। इससे लड़कियों का उत्साह और हौसला बढ़ेगा। बेटे को बेटियों से बढ़कर समझा जाता है। इसी कारण गर्भ में ही कन्याओं की हत्या होती आ रही है। यह अच्छा तरीका है, जिससे बहुत ही खूबसूरती और सरलता से महिला सशक्तीकरण का मुद्दा उठाया जा सकता है। लोगों को जागरूक किया जा सकता है।- अंजू बक्शी, स्कूल की प्रधानाचार्य
एक शिक्षित महिला कई परिवारों को शिक्षा से जोड़ने का काम करती है। लड़की अगर पढ़ी लिखी होगी तो दो घरों में उजाला करेगी। नारी को अबला मत समझें। वह किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रह सकती। वह घर के चूल्हे-चौके से उठकर अंतरिक्ष तक का सफर तय कर सकती है। मैं चाहती हूं कि इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी हमारे स्कूल में हो।- पलक मिश्रा, छात्रा
बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है। अगर एक बेटी नहीं होगी तो बेटा कहां से आएगा। अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स मुहिम बेटियों को हक दिलवाने लोगों को जागरूक करने में मददगार साबित हो सकती है। हिंदू धर्म भी नारी को शक्ति का दर्जा देता है। मैं चाहती हूं कि इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी हमारे स्कूल में होते रहने चाहिए।- आशी खान, छात्रा