महिलाओं को आगे बढ़कर अपने लिए खड़ा होना पड़ेगा। तभी वे अपने और अन्य महिलाओं के हक के लिए लड़ पाएंगी। महिलाओं को खुद को किसी से कम नहीं समझना चाहिए। - तारा शर्मा, हेडमास्टर
समाज में लड़कियों के प्रति नजरिया बदला जा सकता है। लोग लड़कियों को कमजोर समझते हैं पर यह नहीं जानते कि जिम्मेदारी का बोझ पड़ने पर बेटियां लड़कों को भी मात दे सकती हैं। हर क्षेत्र में लड़कियां परचम लहरा रही हैं। - मीनाक्षी शर्मा, शिक्षिका
इस तरह के कार्यक्रम समाज को बदलने का काम करते हैं। आज के समय में नारी अबला नहीं है। वे सबसे आगे हैं। जो मां-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते हैं, उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए। हमें जागरूक होना होगा। - सपना कुमारी, छात्रा
मैं अमर उजाला के इस कदम की प्रशंसा करती हूं। लड़कियां इस कार्यक्रम के जरिए जागरूक हो रही हैं। इस कार्यक्रम से नई पीढ़ी की छात्राओं को सशक्त किया जा सकता है।
- प्रिया चौधरी, छात्रा
महिलाएं हर क्षेत्र में अपना कर्त्तव्य अच्छे से निभा रही हैं। वे सबसे आगे हैं। एक पढ़ी-लिखी महिला अच्छे से परिवार की जिम्मेदारी उठा सकती है। जानवी शर्मा, छात्रा
हमारे सामने कुछ भी गलत हो तो उसके खिलाफ आवाज उठाना हमारा फर्ज बनता है। यदि हम गलत सहेंगे या गलत होते हुए देखेंगे तो यह सबसे बड़ा पाप होगा। खुशबू कश्यप, छात्रा