रियासत में वैदिक काल से अस्तित्व में रहा कैंसर रोधी दुर्लभ वानस्पतिक जीवन खतरे में है। जम्मू और कश्मीर में प्रमुख एंटी कैंसर वनस्पतियों बर्मी, देवदार, बनकाकड़ू पाए जाते हैं। इनमें से बर्मी के पेड़ गिने चुने ही रह गए हैं।
जम्मू डिवीजन में बर्मी पर किए गए अपने शोध में जम्मू विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट आफ बाटनी के असिस्टेंट प्रोफेसर हरीश चंद्र दत्त ने पाया कि उधमपुर के पत्नीटाप के पास समनासर में दो पेड़ के अलावा डोडा के चिराला रेंज तथा कठुआ के बनी क्षेत्र में गिने-चुने पेड़ रहे गए हैं।
इसके अतिरिक्त घाटी के कुछेक हिस्सों में इनकी मौजूदगी न के बराबर रह गई है। साथ ही देवदार और बन काकड़ू के औषधीय उपयोग की जानकारी प्रदेश के 8 से 10 फीसदी लोगों को ही है, जबकि इनका अस्तित्व भी खतरे में है।
अमर उजाला से जेएंडके में पाई जाने वाली एंटी कैंसर वनस्पतियों की जानकारी साझा करते हुए प्रो. हरीश चंद्र ने बताया कि देश भर में पाई जाने वाली करीब 2500 औषधीय वनस्पतियों में से 25 फीसदी का अस्तित्व हिमालयन राज्यों हिमाचल प्रदेश, जेएंडके तथा उत्तरांचल में है।