सरोवरों में मत्स्य पालन और नंदडू उगाकर पंचायत कमा रही हजारों
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। आदर्श पंचायत आल्हा तरक्की की मिसाल पेश कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा पंचायतों में अमृत सरोवर को पुन: जिंदा करने की मुहिम छेड़ी गई है। उसी के चलते आदर्श पंचायत आल्हा में तीन अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार किया गया है, और बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन किया जा रहा है। एक अमृत सरोवर में मत्स्य पालन के साथ नंदडू बड़े पैमाने पर उगता है। ये पंचायत के लिए आय का स्रोत बन गए हैं।
इस समय अमृत सरोवर में मछलियां बड़ी हो गई हैं। इनकी नीलामी के बाद पंचायत को एक अच्छी रकम हासिल हो जाएगी, जिन्हें पंचायत के अन्य निर्माण कार्य में खर्च किया जाएगा। इससे पहले नंदडू की नीलामी पंचायत स्तर पर की गई, और 15 से 20 हजार रुपये नीलामी में पंचायत फंड में जमा हुए। अब पहली बार मत्स्य पालन की नीलामी की जाएगी, जिससे पंचायत को एक अच्छी रकम मिलने की उम्मीद है।
पंचायत में बनाए तीन अमृत सरोवर काफी बड़े हैं, और उनका जीर्णोद्धार करने के लिए सरकार ने फंड मुहैया करवाया था। उनकी चारदीवारी के साथ बोरवेल करवाया गया है, जिससे अमृत सरोवर में पानी डाला जाता है। पंचायत फंड से अमृत सरोवर हर साल साफ किया जाता है, जिससे तीनों अमृत सरोवर पंचायत की सुंदरता का प्रतीक माने जा रहे हैं।
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धान की सिंचाई में भी हो रहा इस्तेमाल
भीषण गर्मी में अमृत सरोवर का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है, क्योंकि तीन अमृत सरोवर हो जाने से पूरे गांव में पानी का स्तर ऊपर बना रहता है। लोगों को पानी की किल्लत महसूस नहीं होती है। इसके अलावा इन तीनों अमृत सरोवरों को गर्मियों में धान की फसल की सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
उपायुक्त ने की थी तारीफ
तकरीबन एक महीना पहले उपायुक्त जम्मू अवनी लवासा ने पंचायत का दौरा किया था, और अमृत सरोवर का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने पंचायत के काम की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में बहुत कम ऐसी पंचायतें हैं, जिनमें अमृत सरोवर का जीर्णोद्धार इस स्तर पर किया गया है। कई पंचायतों में एक भी अमृत सरोवर नहीं है, लेकिन आल्हा में तीन हैं।
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पंचायत के जनप्रतिनिधि कर रहे मिलकर काम
पंचायत के नायब सरपंच लवली सिंह चाढक ने कहा कि पंचायत को आदर्श बनाए रखने के लिए पंचायत के सभी नुमाइंदे मिलजुल कर काम करते हैं। तीन अमृत सरोवर पंचायत में बनाए गए हैं, जिनका रखरखाव पंचायत के पास है। पंचायत के सभी नुमाइंदों ने मिलकर इन अमृत सरोवर को आय का स्रोत बनाने के लिए मंथन किया था, जिसके बाद इनमें मत्स्य पालन शुरू किया गया। दो सरोवरों के मत्स्य की नीलामी थोड़े समय बाद कर दी जाएगी। जो पैसा एकत्रित होगा वह पंचायत के अन्य निर्माण कार्यों में लगाया जाएगा।