-बिना ड्राइवर के धूल फांक रही आठ लाख की एंबुलेंस, छह महीने बिश्नाह अस्पताल में खड़ी रही, अब पिंडी चाढ़का में शोपीस बनी
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अरनिया एंबुलेंस की कमी से जूझ रहा है। जबकि, न्यू टाइप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिंडी चाढ़का में 102 नंबर एंबुलेंस दो महीने से बेकार खड़ी है। आठ लाख की एंबुलेंस पहले छह महीने बिश्नाह अस्पताल में भी शोपीस बनी रही। ड्राइवर न होने से मरीजों को इसकी सुविधा नहीं मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर गंभीर नहीं है।
डीडीसी अरनिया सुरेखा देवी ने करीब दो साल पहले पिंडी चाढ़का न्यू टाइप प्राइमरी हेल्थ सेंटर को एंबुलेंस दी थी। ड्राइवर नहीं होने से करीब छह महीने तक यह बिश्नाह अस्पताल में खड़ी रही। बाद में पिंडी चाढ़का में शिफ्ट कर दिया। यहां भी बिना ड्राइवर के धूल फांकती रही। स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अरनिया को दे दिया। वहां इस्तेमाल होने लगा। पिंडी चाढ़का में जरूरत पड़ने पर वहां भी भेजा जाता। दोनों अस्पतालों के लोगों को फायदा होने लगा। लेकिन, करीब दो महीने पहले डीडीसी सुरेखा देवी ने वापस एंबुलेंस पिंडी चाढ़का भेज दी। वहां ड्राइवर न होने से दो महीने से दोबारा बेकार खड़ी है। टायरों से हवा निकल चुकी है।
स्वास्थ्य केंद्र अरनिया में हो रहा था इस्तेमाल
लोगों का कहना है कि पिंडी चाढ़का का स्वास्थ्य केंद्र 10 से 4 बजे तक खुलता है। जबकि, अरनिया प्राइमरी हेल्थ सेंटर 24 घंटे खुला रहता है। अरनिया में एंबुलेंस का सही इस्तेमाल हो रहा था। लोगों को लाभ मिल रहा था। लेकिन, डीडीसी सदस्य अरनिया सुरेखा देवी ने इसे पिंडी चाढ़का के स्वास्थ्य केंद्र शिफ्ट कर दिया। यहां ड्राइवर न होने से बेकार खड़ी है।
एंबुलेंस का लोगों को मिलना चाहिए फायदा
स्थानीय विनोद कुमार उर्फ पारु ने बताया कि जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग की आपसी खींचतान से आम लोगों का नुकसान हो रहा है। एंबुलेंस को उसकी सही जगह पर शिफ्ट करना चाहिए, ताकि लोगों को फायदा मिल सके।
लोगों को नहीं मिल रहा एंबुलेंस का लाभ
पार्षद कैलाश चंद्र सैनी ने कहा कि व्यवस्था की अनदेखी से आठ लाख रुपये की एंबुलेंस बेकार खड़ी है। लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इसे लेकर बीएमओ से बात की जाएगी।
कोट
एंबुलेंस चलाने के लिए ड्राइवर नहीं मिला है। इसके चलते दो महीने से एंबुलेंस स्वास्थ्य केंद्र में बेकार खड़ी है। इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ड्राइवर मिलने पर ही इसे काम में ला सकेंगे।
डॉ. रूपाली, मेडिकल ऑफिसर, पिंडी चाढ़का
एंबुलेंस की जिम्मेदारी पंच ने उठाई थी। इस मुद्दे पर सीएमओ से भी बात की है। पंचायत को रेजोल्यूशन डालकर गांव के किसी व्यक्ति को ड्राइवर रखने के लिए कहा है। जिस मरीज को वह ले जाएया, उससे पैसे भी लेगा।
सुरेखा देवी, डीडीसी अरनिया