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Amarnath Yatra: हाथ में डमरू और त्रिशूल, दिव्यांगों, किन्नरों, साधुओं पर भोले का नशा, बम बम भोले के जयघोष

Thu, 03 Jul 2025 03:08 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

हाथ में डमरू और त्रिशूल, दिव्यांगों, किन्नरों, साधुओं पर भोले का नशा चढ़ा है। देशभर से पहुंचे साधु संतों में भारी उत्साह है। बम-बम भोले के जयघोष से माहौल शिवमय बन रहा है।
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डमरू और त्रिशूल हाथ में लेकर महादेव का जयघोष लगा कर अमरनाथ यात्रा के लिए जाते तीर्थयात्री - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हाथ में डमरू और त्रिशूल। आसमान में चमकती बिजली और बादलों की गड़गड़ाहट। भोले का नशा दिव्यांगों, किन्नरों और साधुओं सबके सिर पर चढ़ा हुआ था। हर कोई बम-बम भोले और जय शिव शंकर के जयघोष से माहौल को शिवमय बना रहा था। 
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यह मौका था श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के साधु-संतों के पहले जत्थे की रवानगी का। परेड ग्राउंड से बुधवार तड़के 4 बजे पहले जत्थे को रवाना किया गया, जिसमें सैकड़ों साधु-संतों के साथ दिव्यांग और किन्नर भी बाबा बर्फानी के दरबार जा रहे थे। 

उनका कहना था: "बाबा के दरबार तक हमें कोई ताकत नहीं रोक सकती। इनमें कई ऐसे श्रद्धालु भी थे जो बाबा के दरबार में पहले कई बार हाजिरी लगा चुके हैं। तड़के 4 बजे पहले गीता भवन और फिर श्री राम मंदिर, पुरानी मंडी से कतारबद्ध साधु-संतों को परेड के माध्यम से लाया गया। 
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पहले जत्थे में शामिल होने का उत्साह इस कदर था कि हर कोई बाबा के जयकारे लगाते हुए बसों में बैठ रहा था। आंखों में नींद तो थी, पर बाबा के दर्शनों का जोश भी साफ झलक रहा था। बसों में बैठकर साधु-संतों ने भजन-कीर्तन से पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। यात्रा मार्ग पर आम वाहनों की आवाजाही बंद रखी गई थी।

दिव्यांग हूं, 22 साल से आ रहा हूं, हर बार बाबा देते हैं हिम्मत
साधु संतों के जत्थे में शामिल हुए हरियाणा निवासी दिव्यांग कुलदीप ने कहा कि वह 22 वर्षों से बाबा के दरबार में नतमस्तक होने के लिए आ रहे हैं। दोनों टांगें काम नहीं करती हैं, लेकिन हर बार बाबा हिम्मत देते हैं और मैं छूमंतर की तरह उनके पास पहुंच जाता हूं। इस बार पहलगाम रूट से जा रहा हूं, उम्मीद है कोई कष्ट नहीं होगा और यात्रा सफल होगी।

 

मन में कोई डर नहीं, मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं भोलेनाथ
यूपी निवासी किन्नर चाहत ने कहा कि वह पांच बार बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुकी है और इस बार बालटाल से पहले जत्थे में पवित्र गुफा तक जाएंगे। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पर उनका कहना था कि मन में ऐसा कोई डर नहीं है। मैं पिछले 5 साल से यात्रा पर आ रही हूं और मन में कोई डर नहीं है।

विकट परिस्थितियों में भक्तों का साथ देते भोलेनाथ
हरियाणा निवासी किन्नर रिंकी ने कहा कि वह पिछले 15 वर्षों से बाबा के दरबार में जा रही हैं। कभी मन में कोई शंका नहीं रही है। यह उन्हीं का आशीर्वाद है कि हर साल मुझे उनके दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त होता है। वह विकट परिस्थितियों में अपने भक्तों की लाज रखते रहे हैं।

 

मुझ पर 25 वर्षोंं से बाबा का आशीर्वाद, हर साल माथा टेक रहे
हरियाणा निवासी किन्नर शीतल ने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से बाबा के दरबार में माथा टेक रही हैं। उनके आशीर्वाद से ही आज भी हम उनके पास जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन के इंतजामों पर संतुष्टि जताई। कहा, हमें किसी आतंकवाद और दुश्मन का डर नहीं है। हम बाबा के पास जरूर पहुंचेंगे।

पहली बार जाने का आनंद पा रहे
तमिलनाडु निवासी साधु नंजनी ने कहा कि वह पहली बार पहलगाम रूट से श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जा रहे हैं। हमें भी बाबा के पास जाने का सौभाग्य मिला है। खुशी यह है कि हम पहले जत्थे के साथ जा रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द बाबा के दर्शन होंगे।

 
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बाबा बर्फानी के दर्शनमात्र से दूर होते हैं कष्ट
तमिलनाडु निवासी साधु राम ने कहा कि हम 10 सदस्यों के समूह के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आए हैं। पहली बार पहलगाम रूट से दरबार तक पहुंचेंगे। बाबा बर्फानी के दर्शन मात्र से सब कष्ट दूर हो जाते हैं।
 
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