जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर की राह इतनी खौफनाक भी हो सकती है कभी सोचा नहीं था। हालात खराब हो गए हैं ये खबर जरूर मिली, पर जान के लाले पड़ जाएंगे ये मालूम नहीं था। सोनमर्ग से अनंतनाग तक सड़क पर सीवर पाइप, कटे पेड़, कांच, पत्थर, टूटे जले वाहन देखकर सभी के रोंगटे खड़े हो जाते।
मगर आशंकाओं से घिरी वापसी के बीच सेना को देखकर तो जैसे जान में जान ही आ गई। इसके बाद तमाम साथियों को घर वापसी का यकीन हो गया। बाकी का सफर बम बम भोले के जयघोष करते हुए कब कट गया पता ही नहीं चला।
बाबा बर्फानी के यात्रा रूट पर तीन दिन तक फंसे रहने के बाद सोमवार बाद दोपहर जम्मू पहुंचे यात्री अपनी आपबीती में सेना की मौजूदगी को संकट में सहारा ही बताते रहे। दिल्ली से साथियों के साथ अमरनाथ यात्रा कर लौटे दीपक वैद ने कहा बाबा बर्फानी के दर्शन करने के बाद लौटते समय वह आधार शिविर में ही फंस गए थे।
हालात बिगड़ने की सूचनाएं लगातार मिल रही थीं। घर वापसी कैसे होगी ये सवाल खाए जा रहा था। हर घंटे घर में फोन कर कुशलक्षेम बताना पड़ रहा था। पहले सोचा लेह के रास्ते निकल जाएं लेकिन बजट की सीमा थी।