अमर उजाला मेधावी सम्मान समारोह में उप राज्यपाल ने मेधावियों को मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। 12वीं की परीक्षा में पूरे जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक अंक लाने वाली अनुशा गुल और वफा फिरोज को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रथम श्रेणी में पास होना नहीं बल्कि अच्छा इंसान बनाना है।
उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रथम श्रेणी में पास होना नहीं, बल्कि अच्छा इंसान बनना है। वही शिक्षा बेहतर है, जो अच्छा इन्सान बनाए। सीखने की ललक और उत्सुकता जगाए। रटे रटाए ज्ञान के बजाय व्यक्तित्व को चमकाने वाली शिक्षा चाहिए, तभी हम 2047 के विकसित भारत की संकल्पना को साकार कर सकेंगे।
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उपराज्यपाल ने कहा कि आज की प्रतियोगी दुनिया में माता-पिता बच्चों पर बेहतर करने का दबाव बनाते हैं। दूसरों से तुलना करते हैं। विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा कि आप जो हो वही बनो। ईश्वर ने हर बच्चे को अतुलनीय बनाया है। सब कुछ ओरिजिनल है। इसमें कुछ भी डुप्लीकेट नहीं है।
माता-पिता से आग्रह है कि वह अपने बच्चों को डुप्लीकेट बनाने की कतई कोशिश न करें। एलजी सिन्हा ने रविवार को श्रीनगर में अमर उजाला मेधावी सम्मान समारोह में मेधावियों को यह सीख दी।
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कश्मीर में इस आयोजन की दूसरी कड़ी में उन्होंने 10वीं व 12वीं बोर्ड के कश्मीर संभाग के सभी 10 जिलों के 278 मेधावियों को सम्मानित किया। उपराज्यपाल
ने 12वीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में सर्वाधिक अंक लाने वाली अनुशा गुल और वफा फिरोज को सम्मानित किया।
दोनों ने वाणिज्य वर्ग में 500 में 498 अंक हासिल किए हैं। एलजी ने सभी विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि सबसे अच्छी शिक्षा वह है, जो बच्चों में जिज्ञासा जगाए और व्यक्तित्व का निर्माण करे। सकारात्मक बदलाव ला सके। दुनिया तेजी के साथ बदल रही है।
उसके साथ सामंजस्य बैठाने के लिए यह जरूरी है कि हमें रोज नई जिज्ञासाओं के प्रति आकर्षित होना चाहिए। कार्यक्रम में कुलपति स्कॉस्ट कश्मीर प्रो. नजीर अहमद गनेई, कुलपति सेंट्रल यूनिवर्सिटी कश्मीर प्रो. रवींद्र नाथ, प्रमुख सचिव शिक्षा सुरेश कुमार गुप्ता, आयुक्त सचिव सामान्य प्रशासन संजीव वर्मा, एसीबी निदेशक शक्ति पाठक, डीसी बिलाल मोहिउद्दीन भट्ट, डीआईजी राजीव पांडेय मौजूद रहे।
जिज्ञासा बनाएं रखें... यही सफलता की कुंजी
उपराज्यपाल ने कहा कि बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है वैसे वैसे वह सिलेबस से घिर जाता है। प्रश्न पूछने तथा जिज्ञासा की उसकी प्रवृत्ति कम होती जाती है। इस वजह से यह जरूरी है कि उसकी जिज्ञासा को हमेशा बनाए रखा जाए। यह सफलता की कुंजी है।
शिक्षकों को सीख, बच्चों को चुनौतियों से जूझना सिखाएं
उपराज्यपाल ने शिक्षकों को सीख देते हुए कहा कि उनका दर्जा भगवान और अल्लाह से भी ऊंचा है, क्योंकि वे बच्चों को दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का दायित्व केवल लिखा हुआ पढ़ाना नहीं है बल्कि बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के प्रति सचेत करना भी है। उन्हें इनोवेशन के प्रति जागरूक करना होगा। ऐसा क्लास रूम विकसित करना होगा जहां बच्चे जिज्ञासु प्रवृत्ति की बने। जिज्ञासा ही सभी प्रकार की शंकाओं का समाधान करेगा और बच्चा देश निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दे सकेगा।
अंकों की दौड़ में शामिल न होने की सलाह
उप राज्यपाल ने बच्चों को अंकों की दौड़ में शामिल न होने की सलाह देते हुए कहा कि कबीर दास लिखना नहीं जानते थे, लेकिन उन्होंने ग्रंथ की रचना की। इसी प्रकार रामानुजम 12 वीं पास नहीं थे, लेकिन वे विश्व में महान गणितज्ञ बने। यह सब जिज्ञासा की बदौलत ही हो सका।
ज्ञान प्लेटफार्म का लाभ उठाएं युवा
एलजी ने युवाओं से जीवन में नए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए आज के गतिशील, प्रतिस्पर्धी माहौल और ज्ञान प्लेटफार्मों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस महान राष्ट्र के युवा के रूप में आपको विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में योगदान देना चाहिए।
मेरा मानना है कि शिक्षा का लक्ष्य संख्या और रैंकिंग तक सीमित नहीं है। यह बेहतर इंसान और भविष्य के नेताओं के निर्माण के बारे में भी है, जो शिक्षा क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरतों के बीच अंतर को पाटेंगे।
हमारा ध्यान आजीवन सीखने के कौशल, रचनात्मकता, जिज्ञासा, समस्या समाधान और आलोचनात्मक सोच पर भी होना चाहिए। इससे प्रतिभाशाली युवाओं को मूल्यवान और विशेष कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाएगी।
बच्चों को इनोवेशन के लिए प्रेरित करें शिक्षक
शिक्षकों को नसीहत दी कि उनका दायित्व है कि बच्चों को बेहतर इंसान बनाएं। इसके लिए जरूरी है कि किताबी तथा क्लासरूम के बाहर की दुनिया की भी उन्हें जानकारी दी जाए। इससे उनके ज्ञान का स्तर बढ़ेगा। बच्चों को नई नई इनोवेशन के लिए प्रेरित करें। किताबों में लिखा पढ़ाना ही उनका दायित्व नहीं है।
प्रतिभा को निखारना तथा तराशना उनकी जिम्मेदारी है जिससे वह सफल इंसान बन सके। साथ ही उनका व्यक्तित्व निखर सके और राष्ट्र निर्माण में उनकी सकारात्मक भूमिका सामने आए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) ने इस दिशा में बहुत अधिक प्रयास किए हैं जिसके सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में एनईपी की सिफारिशों को काफी हद तक लागू किया गया है जिसके परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
अभिभावकों को बच्चों की रुचि के अनुसार करियर चुनने की आजादी देने की सलाह
उप राज्यपाल ने अभिभावकों को भी सलाह दी कि बच्चों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने की छूट देनी चाहिए। उन पर कोई चीज थोपनी नहीं चाहिए और न ही किसी से तुलना करनी चाहिए। बच्चों को उसके स्वाभाविक गुणों के अनुरूप आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए।
यह गुण उनके अंदर कुदरत से मिलता है। निश्चित रूप से वह इसमें बेहतर करेगा। अक्सर हम बच्चों पर अपनी भावना थोपने की गलती करते हैं। इसमें यदि वह सफल नहीं हुआ तो फिर मन में आत्मग्लानि की भावना आएगी जो उसके व्यक्तित्व विकास पर नकारात्मक असर डालेगा।