उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि पूर्व छात्र केवल पूर्व छात्रों का एक नेटवर्क नहीं है, बल्कि मानवीय क्षमता का एक नेटवर्क है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित है। पूर्व छात्र कश्मीर विश्वविद्यालय की 77 साल की विरासत के जीवंत प्रमाण हैं। एलजी ने प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों से जम्मू-कश्मीर के उच्च शिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता और नेटवर्क का उपयोग करके जम्मू-कश्मीर की शांति व प्रगति में योगदान देने के लिए आगे आने का आह्वान किया।
सिन्हा रविवार को कश्मीर विश्वविद्यालय में मेगा पूर्व छात्र सम्मेलन-2025 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पूर्व छात्रों को बधाई दी और कश्मीर विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों को युवा छात्रों को उनकी इंटर्नशिप और करियर की संभावनाओं में आवश्यक सहयोग और सहायता प्रदान करनी चाहिए, उन्हें प्रेरित, मार्गदर्शन और सशक्त बनाना चाहिए और नई पीढ़ी के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करना चाहिए। निस्वार्थ आदान-प्रदान की परंपरा हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। मेरा मानना है कि वैश्वीकरण के युग में, पूर्व छात्रों का जुड़ाव किसी भी संस्थान और क्षेत्र के विकास के लिए सबसे प्रभावी रणनीति है।
उन्होंने कहा, कश्मीर विश्वविद्यालय को पूर्व छात्रों के लिए एक संस्थागत तंत्र बनाना चाहिए जो उन्हें विश्वविद्यालय को कुछ वापस देने का अवसर प्रदान करे। उपराज्यपाल ने भारत के अतीत के गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अक्षरशः लागू करने पर ज़ोर दिया।
उन्होंने कहा कि डिज़ाइन योर ओन डिग्री जैसे हमारे अभिनव कार्यक्रम देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं। उपराज्यपाल ने हाल ही में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) में प्रतिष्ठित ए++ ग्रेड प्राप्त करने और देश के शीर्ष संस्थानों में अपना स्थान सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर विश्वविद्यालय को बधाई भी दी।
इस समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. कर्ण सिंह, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद, सांसद मियां अल्ताफ अहमद, न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल, न्यायमूर्ति संजय धर, न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी, न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी और कश्मीर विश्वविद्यालय के अन्य प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के अनुकरणीय योगदान को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति पंकज मित्तल, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे, कुलपति प्रो. नीलोफर खान भी उपस्थित थे।