मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि क्षेत्र में शांति तथा स्थायित्व के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू होनी चाहिए। कश्मीर के हालात पर मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शांति प्रक्रिया में सभी पक्षों को शामिल किए जाने पर भी सहमति बनी। हालांकि हुर्रियत का नाम नहीं लिया गया।
मुख्य विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस ने बैठक का बहिष्कार किया। एसकेआईसीसी में पांच घंटे तक चली बैठक में तीन सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया। जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर संसद में दिखी राजनीतिक सहमति का स्वागत करते हुए कश्मीर की समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय पहल शुरू करने की आवश्यकता बताई गई।
शांति तथा सुलह की प्रक्रिया में सभी पक्षों को शामिल करने पर सहमति बनी। दो मिनट का मौन धारण कर हिंसा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
महबूबा ने कहा कि देश के राजनीतिक नेतृत्व को सभी पक्षकारों को साथ लेकर जम्मू-कश्मीर की आंतरिक और बाहरी चुनौतियों को हल करने के लिए राजनीतिक और विकास प्रधान एजेंडे को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। सभी पक्षकारों तक पहुंचने में राज्य सरकार मदद करेगी।
हिंसा पर चर्चा के लिए विधानसभा सत्र बुलाने की मांग
कश्मीर में हिंसा
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नया अध्याय सभी पक्षों तक पहुंचकर ही लिखा जा सकता है। इनमें युवा भी शामिल हैं जिन्होंने राज्य के हालात की सबसे ज्यादा कीमत चुकाई है। विश्वास बहाली के ठोस उपाय किए जाने चाहिए।
2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह द्वारा गठित पांच कार्य समूहों की सिफारिशों तथा पीडीपी-भाजपा के एजेंडा आफ एलायंस में दोहराई गई बातों पर अमल से इसकी शुरूआत की जा सकती है।
सिफारिशों में केंद्र राज्य संबंधों सहित राज्य के आर्थिक विकास में समाज के सभी वर्गों में नियंत्रण रेखा के पार संबंधों को मजबूत करने पर भी बल है। बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार की ओर से किए गए प्रयासों पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि सरकार देर से जागी। बुरहान के मारे जाने के बाद वह लोगों की नब्ज टटोलने में विफल रही।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। पैंथर्स पार्टी के हर्षदेव सिंह तथा बलवंत सिंह मनकोटिया ने राज्यपाल शासन की वकालत की। माकपा के मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने राष्ट्रीय सहमति पर बल दिया। नेकां के अनुपस्थित रहने पर मुख्यमंत्री ने निराशा जताते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया था। इसके बाद भी वे नहीं आए।
बैठक में पारित प्रस्ताव
1. कश्मीर हिंसा में मारे गए लोगों व घायलों के प्रति गहरी संवेदना।
2. संसद के दोनों सदनों में कश्मीर मुद्दे पर नजर आई राजनीतिक सहमति को आगे बढ़ाते हुए रियासत के हालात सुधारने के लिए राष्ट्रीय पहल शुरू की जाए।
3. शांति तथा सुलह की प्रक्रिया में सभी हकदारों को शामिल किया जाए।
हुर्रियत से बातचीत पर बाद में सोचेंगे : निर्मल
उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह
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उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने कहा कि कश्मीर में शांति बहाली सरकार की प्राथमिकता है। हुर्रियत से बातचीत पर बाद में सोचा जाएगा। सिंह ने कहा कि सर्वदलीय बैठक सकारात्मक रही है। सभी दलों से अहम मुद्दों पर चर्चा करने के साथ कई सुझाव लिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पैलेट गन एक बड़ा मुद्दा है। यह एक बड़े वर्ग से जुड़ा मामला है। लेकिन इस पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। राज्य सरकार युवाओं को रोजगार देने की दिशा में उचित प्रयास कर रही है। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर शुरू किए गए हैं।
हर्षदेव-सज्जाद लोन में तकरार
बैठक में हर्षदेव सिंह ने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले बड़े- बड़े वायदे किए थे। कहा था कि आतंकी घटनाएं नहीं होंगी। पाकिस्तान हमारी ओर आंख उठाकर नहीं देख सकेगा। लेकिन, आज पीडीपी के सामने भाजपा लेट गई है।
हर्षदेव सिंह का कांग्रेस के शाम लाल ने भी समर्थन किया। इस पर समाज कल्याण मंत्री सज्जाद लोन ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जब भी ऐसा मामला आता है तो उसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जाता है। जम्मू और कश्मीर को बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इस पर हर्षदेव ने कहा कि जब सच्चाई सुननी नहीं है तो आपको बैठक से बाहर चले जाना चाहिए।