जम्मू-कश्मीर में गांवों के विकास के लिए केंद्र सरकार की तरफ से मिली 700 करोड़ की राशि के खर्च करने को लेकर ग्राम सभा व सरपंचों के लिए निर्देशावली पर ऑल जम्मू कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस ने नाराजगी जताई है।
रियासत में सरपंचों के प्रमुख संगठन ऑल जम्मू कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस के अध्यक्ष अनिल शर्मा के अनुसार ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग को मिली 700 करोड़ की राशि से अब तक दो किश्तें डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफार्मर (डीबीटी) मोड से सरपंचों व ग्राम सेवकों के संयुक्त खाते में राशि पहुंच चुकी है।
समस्या यह हैं कि ग्राम संभाग अपनी मनमर्जी से इस राशि को खर्च नहीं कर पा रही है। विभाग की तरफ से निर्देशावली हैं कि संबंधित कार्य पर भी राशि खर्च हो। मसलन खेल के मैदान पर यह रिपेयर वर्क पर। मसला यह हैं कि जिस गांव में सरपंच व ग्राम सभा चाहती हैं कि गांव को नशा मुक्त बनाया जाए और इसके लिए युवाओं के लिए जिम या अखाड़ा खोला जाए। वह ऐसा नहीं कर पा रहे है। ऐसा ही ग्राम सभा को अधिकार होना चाहिए कि वह अपनी मर्जी से विकास कार्य करवाए ताकि सही मायने में गांवों का विकास सुनिश्चित हो सकें।
हालांकि ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग की सचिव शीतल नंदा के अनुसार सरपंचों व ग्राम सेवकों के संयुक्त खाते में अब तक तीन किश्तें जारी कर दी गई है। ग्राम सभा की मंजूरी से राशि का खर्च होना हैं। हां राशि खर्च करने के लिए प्राथमिकताएं निर्देशावली में दर्शाई गई हैं। उदाहरण के तौर पर जैसे गांवों में खेल का मैदान होना चाहिए। बुनियादी सुविधाओं पर राशि खर्च होनी चाहिए आदि।