चीन में प्रकोप ढा रहे कोविड के नए वैरिएंट को लेकर भारत में अलर्ट किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जीनोम सीक्वेंसिंग कोविड परीक्षण बढ़ाने पर जोर दिया है, लेकिन पिछली लहरों से सीख न लेते हुए जम्मू में अभी जीनोम सीक्वेंसिंग मशीनें स्थापित ही नहीं की जा सकी हैं।
जीएमसी जम्मू और एमसीएच (जच्चा बच्चा) अस्पताल गांधीनगर में एक-एक मशीन लगाई जानी है, लेकिन अस्पतालों में पैकेटों में बंद पड़ी मशीनें धूल चाट रही हैं। इससे ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट की पहचान के लिए जम्मू के मरीजों को फिर दिल्ली के नेशनल सेंटर फार डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) पर निर्भर रहना पड़ेगा।
नए वैरिएंट की जल्द पहचान न होने के कारण रोगी चिकित्सा देखभाल पर भी असर पड़ता है। चीन में ओमिक्रॉन का नया वैरिएंट तबाही मचा रहा है। भारत में भी इस वैरिएंट की दस्तक हो चुकी है, जिससे देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए वेरिएंट के पहुंचने की आशंका है।
नए वैरिएंट की पहचान के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अलर्ट किया है। एमसीएच अस्पताल गांधीनगर में इस साल कोविड के थमने के बाद जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन लगाने की कवायद की गई। जुलाई में अस्पताल में मशीन को पहुंचा भी दिया गया, लेकिन अब तक मशीन को स्थापित नहीं किया जा सका है।
इसी तरह जीएमसी जम्मू में भी जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन को जल्द स्थापित करने के अभी तक दावे किए जा रहे हैं। नए वेरिएंट की पहचान करने की प्रणाली में कुल संक्रमित मामलों में अलग अलग पांच प्रतिशत आरटीपीसीआर के नमूने लिए जाते हैं, जिनकी जेनेटिक सीक्वेंसिंग की जाती है।
हालांकि चीन में मिले नए वेरिएंट को देखते हुए अब सभी संक्रमित लोगों के जीनोम सीक्वेंसिंग पर जोर दिया जा रहा है, ताकि नए वेरिएंट की जल्द पहचान करके बेहतर कोविड प्रबंधन पर काम किया जा सके। लेकिन स्थानीय स्तर पर जीनोम सीक्वेंसिंग कोविड परीक्षण के अभाव में संक्रमण फैलने पर मरीजों की हालत खराब हो सकती है।
अगले 15 दिन में मशीन लगाने की तैयारी-प्रिंसिपल
जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन का कहना है कि जीएमसी और एमसीएच में अगले एक हफ्ते या 15 दिन के भीतर जीनोम सीक्वेंसिंग लगाने की तैयारी की जा रही है। इसमें तकनीकी स्तर पर काम किया जा रहा है। मशीन को चलाने के लिए स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाएगा।