जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से पहुंच रहे मोबाइल सिग्नल को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। अमरनाथ यात्रा से पहले मिले इनपुट के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों व संवेदनशील प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। 2019-20 में भी पीर पंजाल क्षेत्र में आतंकवादी अत्यधिक एन्क्रिप्टेड वाईएसएमएस व अन्य आधुनिक संचार तकनीकों का इस्तेमाल करते रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई है कि इन संचार माध्यमों से आतंकी संगठन सीमा पार बैठे आकाओं और ओवर ग्राउंड वर्करों से संपर्क कर रहे हैं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से आने वाले मोबाइल सिग्नल भारतीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं। कई एजेंसियों से मिले इनपुट के अनुसार कश्मीर में बारामुला और कुपवाड़ा से लेकर जम्मू संभाग के जम्मू, कठुआ, राजोरी व पुंछ जिलों तक ऐसे सिग्नल की पहुंच दर्ज की गई है। इसका इस्तेमाल आतंकियों और पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं के बीच संचार हो रहा है।
लोरा, वाईएसएमएस, बायडू और थुराया सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसी विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये तकनीक पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं होती और कई बार सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में नहीं आतीं। वाईएसएमएस ऐसी तकनीक है, जिससे स्मार्ट फोन और रेडियो सेट को मर्ज कर गुप्त संदेश भेजे जा सकते हैं। इनको पकड़ (डिकोड) पाना आसान नहीं रहता है। इसी को देखते हुए जेलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। अमरनाथ यात्रा को ध्यान में रखते हुए सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी व तकनीकी सर्विलांस बढ़ा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध संचार गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
डोरिमल-गंभीर मुगला के जंगलों में आतंकियों की तलाश जारी, संदिग्ध ठिकानों पर दागे गोले
मंजाकोट सेक्टर के डोरिमल-गंभीर मुगला के जंगलों में छिपे आतंकियों की तलाश जारी है। सोमवार को दसवें दिन भी सर्च ऑपरेशन जारी रहा। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, पैरा कमांडो व अन्य सुरक्षा एजेंसियां आतंकी ठिकानों की लगातार जांच कर रही हैं। सुरक्षाबलों ने कई संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाते हुए गोले दागे। दुर्गम इलाकों का चप्पा-चप्पा खंगाला जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि दो से तीन आतंकी अब भी छिपे हो सकते हैं। सुरक्षाबलों ने जंगलों को घेरकर तलाशी ली। आधुनिक निगरानी उपकरणों व ड्रोन की मदद से इलाके पर कड़ी नजर रखी जा रही है। अभियान में शामिल जवानों को दुर्गम भूभाग, घने जंगलों व प्रतिकूल मौसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र की संवेदनशीलता व आतंकियों की संभावित मौजूदगी को देखते हुए ऑपरेशन जल्द समाप्त नहीं किया जाएगा। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। अभियान की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बलों की भी तैनाती की जा सकती है।