जम्मू के अखनूर के बट्टल गांव में स्थित शिवआसन मंदिर के प्रति लोगों की आस्था का ही कमाल है कि तीन बच्चों को बंदी बनाने के बावजूद आतंकियों ने उन्हें कुछ नहीं किया। लोगों का मानना है कि शिव की भक्ति ही उन्हें बचा गई। मंदिर में कोई पुजारी भी नहीं रहता।
मंदिर सारी रात खुला ही रहता है। लोग खुद ही यहां पूजा अर्चना करते आते हैं। सोमवार को खासतौर पर आते हैं। बंदी बनाए गए बच्चों में से आकाश का कहना है कि जब मंदिर में गए थे। तब देखा कि मंदिर में शिवलिंग पर फूल चढ़े हुए हैं जल भी।
इससे अंदाजा लगाया गया कि कुछ लोग आतंकियों के आने से पहले ही मंदिर में गए हुए थे। ऐसे में माना जा रहा है कि आतंकी मंदिर में सुबह 6 से 7 बजे के बीच घुसे। दरअसल, ये मंदिर काफी प्राचीन और विख्यात है। एलओसी पर मनावर तवी के तट पर स्थित जन्माष्टमी तथा शिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।
शिव आसन मंदिर क्षेत्र का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां दूरदराज से भी लोग भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं। बताया जाता है कि यहां पर भी भगवान शिव ने आसन लगाया था। इस मंदिर की स्थापना 1837 में बाबा खाक नाथ द्वारा की गई थी।
बाबा खाक नाथ यहां धूनी लगाकर पूजा करते थे। वह मंदिर के भीतर किसी भी को नहीं आने देते थे। यहां के लोगों के अनुसार वह बाबा बूढ़ा अमरनाथ की भांति यात्रा चलाने की प्रशासन से कई बार मांग कर चुके हैं।
मंदिर कमेटी के सदस्य व स्थानीय निवासी मास्टर यशपाल और पूर्व सरपंच रतन लाल शर्मा के अनुसार वैसे तो इस शिव आसन मंदिर में हर रोज लोगों का आना जाना रहता है, लेकिन जन्माष्टमी और महाशिवरात्रि पर्व पर यहां रौनक देखते बनती है।
बट्टल में 27 घंटे चली मुठभेड़, दो और आतंकी ढेर, मंदिर की बेसमेंट में छिपे थे
अखनूर के बट्टल इलाके में 27 घंटे तक चली मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो और आतंकियों को ढेर कर दिया। आतंकी मंदिर की बेसमेंट में छिपे थे। सोमवार रातभर सेना ने आतंकियों को घेरे रखा और इनको बाहर नहीं निकलने दिया। मंगलवार की सुबह होते ही दो घंटे के भीतर ही इनको मार गिराया। आतंकियों के पास से बड़ी संख्या में गोला-बारूद और हथियार बरामद किए गए हैं।
एसएसपी जम्मू जोगिंदर सिंह ने बताया कि रात भर आतंकियों ने फायरिंग नहीं की। मंगलवार सुबह सात बजे अंतिम हमला किया, लेकिन दो घंटों के भीतर ही दोनों दहशतगर्दों को मार गिराया गया। सैन्य काफिले पर हमला करने वाले तीनों आतंकियों का खात्मा किया जा चुका है। सेना के मेजर जनरल समीर श्रीवास्तव का कहना है कि आतंकियों को मार गिराने के लिए एआई और मानव रहित वाहन का इस्तेमाल किया गया। इनकी मदद से हमें त्वरित और सफल परिणाम मिले। बीएमपी वाहन का इस्तेमाल करने पर कहा कि हमने उस तरह के वाहन का इस्तेमाल किया था, क्योंकि इलाका कठिन था। 30 डिग्री की ढलान और घना जंगल था।
डीआईजी जम्मू शिवकुमार का कहना है कि सेना और पुलिस के बीच समन्वय के साथ यह सफलता मिली है। हमने कई बैठकें सेना के साथ की हैं। इसका उद्देश्य यह है कि सेना और पुलिस के बीच समन्वय बना रहे, ताकि हम कहीं भी किसी भी आतंकवादी की मौजूदगी का पता लगाने पर उसे तुरंत अंजाम तक पहुंचा सकें। इसके लिए हमारा तालमेल दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। यह ऑपरेशन एक ऐसा ही उदाहरण है।
बड़ी तैयारी के साथ आए थे आतंकी
आतंकियों के पास जिस तरह से गोला-बारूद और सामान बरामद हुआ है। उससे साफ है कि आतंकी बड़े हमले और लंबी मुठभेड़ के लिए आए थे। आतंकियों के पास दर्द निवारक दवाएं, ड्राई फ्रूट, एम4 और एके47 राइफल, पूरी तरह से भरी हुईं मैगजीन मिली हैं। इस सामान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि दहशतगर्द बड़े हमले और अधिक देर तक लड़ने के इरादे से आए थे। इनकी आयु 18 से 20 वर्ष के बीच है, जबकि ये कुछ समय पहले ही प्रशिक्षित हुए थे। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार सुबह आतंकियों ने ऑपरेशन पर मौजूद कुछ सैन्य अफसरों पर ग्रेनेड फेंकने का प्रयास किया। ये सैन्य अफसरों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से आए थे।
ये हथियार और सामान बरामद
आतंकियों के पास एम4, दो एकके47 राइफल, एम4 की तीन भरी हुईं मैगजीन, भरी हुई सात एके47 की मैगजीन, एक चाइनीज पिस्टल भरी हुई, तीन चाकू, पावर बैंक, एक हैंड ग्रेनेड, एक डिजिटल घड़ी, नोटपैड, तीन कंबल, तीन जोड़ी जूते, ड्राई फ्रूट, दर्द निवारक दवाइयां, बीटाडीन, पट्टियां, तीन बैग, गोला-बारूद रखने वाले पाउच आदि बरामद किए गए हैं। डीआईजी शिव कुमार का कहना है कि आतंकियों के पास जिस तरह से सामान बरामद हुआ है। उससे साफ है कि ये बड़ी तैयारी और बड़े हमले के इरादे से आए थे।