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नड ब्लाक बन रहा मशरूम के कारोबार का क्षेत्र

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सांबा। किसानों की आय बढ़ाने में मशरूम उत्पादन का फार्मूला कारगर साबित हो रहा है। जिले के नड ब्लॉक के किसान मशरूम से अपनी तकदीर बदल रहे हैं। नड ब्लॉक अब मशरूम उत्पादन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है, जिससे से प्रेरणा लेकर सांबा जिले के 400 किसानों ने आय बढ़ाकर अपनी तकदीर बदली है।
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स्थानीय निवासी अजीत कुमार, रंजीत मनकोटिया ने कहा कि किसान यूनियन के जिला प्रधान स्व कर्ण सिंह उनके प्ररेणास्रोत रहे हैं। बीस वर्ष पूर्व उन्होंने नड क्षेत्र में मशरूम की पैदावार शुरू की। उन्होंने ही गांव के लोगों को इस ओर आकर्षित किया। हम भी उन्हीं के कहने पर मशरूम की पैदावार से जुडे़ हैं।
उन्होंने कहा कि 12 वर्ष से वह मशरूम के कारोबार में जुडे़ हुए हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं। किसान नेता स्वर्गीय कर्ण सिंह ने नड क्षेत्र के दर्जनों लोगों को इस पेशे के साथ जोड़ा, जो आज अच्छी कमाई कर रहे हैं। अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। नड क्षेत्र में 48 प्रतिशत स्थानीय लोग मशरूम की पैदावार के साथ जुडे़ हैं। जिला सांबा में 400 से अधिक किसान पहले से ही मशरूम की फसल लगा रहे हैं। दो एयर कंडीशंड प्लांट भी लगाए हैं, जिनसे वह अच्छी कमाई कर रहे हैं। अब कृषि विभाग की ओर से किसानों को सब्सिडी पर शेड और बीज दिए जा रहे हैं। किसानों की समस्या थी कि उन्हें हिमाचल प्रदेश से कंपोस्ट बीज लाना पडुुता था, अब एक यूनिट कठुआ में लगा है। दुसरा सांबा के शह बलोढ में लगाया जा रहा है। ताकि किसानों को सस्ता बीज उपलब्ध कराया जा सके।
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अरसे से इस कारोबार से जुड़े हैं। इससे अच्छा लाभ मिल रहा है। जब मशरूम का कारोबार शुरू किया था तब आठ हजार रुपये खर्च कर डेढ़ लाख रुपये कमाई की थी। अब बीज के लिए 600 लिफाफे का आर्डर दिया है। अपना एक संगठन बनाया है। समता मशरूम उत्पादक कंपनी, जिसमें 400 किसान जुडे़ हैं। जो अच्छी कमाई कर रहे हैं। नड सुंब में ही एक सीजन में करीब दो करोड़ का कारोबार हो रहा है।
-पवन कुमार, मशरूम उत्पादक, नड, सांबा।
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मशरूम के कारोबार से परिवार का पालन पोषण चल रहा है। बाजार में भी अच्छा दाम मिल जाता है। सांबा, दियाला चक मंडी के साथ कई बार जम्मु व उधमपुर मंडी में भी बिक्री की जाती है। मेहनत है, लेकिन अच्छी आय का भी साधन है।
-राजेश कुमार, मशरूम उत्पादक, कलोया, सांबा।
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पिछले वर्ष शुरूआत की थी, थोड़ा सा धन खर्च कर अधिक मुनाफा कमाया था। अब अधिक मशरूम की फसल लगाएंगे। प्रथम अक्टूबर को मशरूम की खेती शुरू होती है। ढाई माह तक सीजन में अच्छी कमाई होती है। शुरू-शुरू में दो सौ रुपये किलो तक भी बिक्री हो जाती है। बाद में 150 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मंडी में मशरूम बिक जाती है।
-लक्ष्मी देवी, मशरूम उत्पादक, राजपुरा, सांबा।
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मशरूम की फसल के लिए किसानों को शेड बनाने के लिए 75 हजार रुपये सब्सिडी के तौर पर विभाग दे रहा है। इसमें बीज भी शामिल है। अब नए किसान काफी आ रहे हैं। इसके लिए पंजीकरण किया जा रहा है। शाह बलोढ में मशरूम के लिए कंपोस्ट तैयार करने का प्लांट लगाया जा रहा है। जिसमें दस हजार लिफाफा प्रतिदिन तैयार किया जाएगा। जो सस्ते दाम पर किसानों को दिया जाएगा। इस समय नड में अधिक कारोबार है। सुंब, सीमावर्ती गांवों में भी किसान मशरूम की फसल लगाने के लिए तैयारी कर रहे हैं।
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-संजय वर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी, सांबा।
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