सांबा। जिले के सीमावर्ती गांवों के किसानों की 7400 कनाल भूमि बंजर बन चुकी है। पहले किसान जीरो लाइन तक खेती करते थे। कारिगल युद्व के बाद किसानों ने जीरो लाइन के निकट की खेती को छोड़ दिया। सेना की ओर से बारूदी सुरंगें बिछा दी थी। बाद में घुसपैठ को रोकने के लिए जब सीमा पर तारबंदी लगाई गई तो आगे की भूमि पर दो तीन वर्ष तक किसानों ने खेती की थी।
उसके बाद भूमि बंजर बनी रही। जो करीब 16 वर्ष से बंजर पड़ी हुई है। पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम के बार-बार उल्लंघन के भय से किसानों ने तारबंदी के आगे की खेती को छोड़ दिया था, जो बंजर बन चुकी है। राजस्व विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार कि 7400 कनाल भूमि तारबंदी के आगे है। जो बंजर बनी हुई है। इसमें राजपुरा तहसील की 2500 कनाल, सांबा तहसील की 3000 कनाल और रामगढ़ तहसील की 1900 कनाल भूमि तारबंदी के आगे है। जिसे अब सरकार बंजर भूमि को आबाद करा कर किसानों को सौपेंगी। खर्च सरकार की ओर से किया जाएगा। जबकि फसल किसान लेगा। अब सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों को भी कुछ राहत मिली है।