आरएस पुरा। माकपा नेता किशोर कुमार ने किसान बिल को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि देश के अन्न्दाताओं की समस्याओं को न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। केंद्र सरकार ने किसानों को विश्वास में लिए बिना ही यह बिल बनाया और उसे पास भी कर दिया। बातचीत कर अगर यह विधेयक लाया जाया तो जिस प्रकार किसान आंदोलन कर रहे हैं ऐसा नहीं होता।
उन्होंने कहा कि देश की अर्थ व्यवस्था को मजबूूत बनाए जाने के लिए एक भूमिका रही है। किसानों को उनकी मेहनत की बेहतर कीमत मिलने के साथ उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। जम्मू कश्मीर पीपुल सेक्युलर फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की ओर से तीनों कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगाकर किसान आंदोलन का बेहतर समाधान निकालने के लिए चार सदस्यों की कमेेटी का गठन किया। उसमें न तो केंद्र सरकार और न ही किसानों का कोई सदस्य है। उन्होंने कहा कि केंद्र की सरकार को चाहिए था कि वह किसानों के आंदोलन को देखते हुए कोई लचीला रुख अपनाती, लेकिन ऐसा नहीं किए जाने पर उच्चतम न्यायालय द्वारा सुप्रीम फैसला किया है। किसानों को भी सहयोग करने के लिए कहा।