उपराज्यपाल ने शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जम्मू में कई कृषि अवसंरचना सुविधाओं का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने स्टार्टअप आउटरीच कार्यक्रम को भी संबोधित किया जिसमें जम्मू संभाग के शोधकर्ता,युवा उद्यमी और किसान शामिल हुए।
सिन्हा ने कहा कि युवाओं को विदेशी मॉडलों की नकल करने के बजाय जम्मू-कश्मीर की अपनी परिस्थितियों और समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों के जरिए समाधान तलाशे जा रहे हैं और जम्मू-कश्मीर में भी स्थानीय जरूरतों के मुताबिक नए प्रयोग किए जाने चाहिए।
उद्घाटित सुविधाओं में उन्नति गर्ल्स हॉस्टल, कृषि में एआई एवं मशीन लर्निंग केंद्र, मशरूम अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र, उन्नत रेशम उत्पादन प्रयोगशाला और डिजिटल मीडिया एवं प्रकाशन केंद्र शामिल हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि ये सुविधाएं केवल भवन और बुनियादी ढांचा नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के किसानों, शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों और युवा उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं का आधार हैं। उन्होंने युवाओं से पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर कोल्ड चेन, ग्रेडिंग-पैकेजिंग, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटप्लेस जैसे क्षेत्रों में अवसर तलाशने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के कृषि उत्पादों को दिल्ली, दुबई और अन्य बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
महिला उद्यमिता पर जोर देते हुए सिन्हा ने कहा कि महिलाओं की समान और सक्रिय भागीदारी के बिना उद्यमिता की क्रांति पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को वित्त, तकनीक और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। उपराज्यपाल ने बताया कि जम्मू अब तक 150 से अधिक छात्रों का आइडिया इन्क्यूबेशन के लिए चयन कर चुका है और 56 संभावित स्टार्टअप को सहयोग दिया गया है।