चार साल में जैविक खेती को एक कनाल से पांच एकड़ तक पहुंचाया, कई किसानों को भी जोड़ा
राजीव सिंह लंगेह
अरनिया। गांव आल्हा के किसान कमल किशोर शर्मा ने जैविक खेती में कीर्तिमान स्थापित किया है। चार साल पहले चंडीगढ़ में अधिवक्ता से प्रेरित होकर जैविक खेती शुरू की। कमल ने गणित में मास्टर किया है। दो बार सरकारी नौकरी छोड़ चुके हैं। मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर एक कंपनी में तैनात हैं। कृषि विभाग के साथ निरंतर संपर्क में रहने के बाद जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।
चार साल पहले एक कनाल से जैविक खेती शुरू की थी। मौजूदा समय में पांच एकड़ पर खेती कर रहे हैं। क्षेत्र के किसानों को भी इसके साथ जोड़ा है। कमल किशोर अभी तक धान, गेहूं, सरसों और माश की दाल की जैविक तरीके से खेती कर चुके हैं। हल्दी और बागवानी को जैविक खेती पर लाना उनका सपना है। कमल किशोर खेती की एडवांस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली में कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के संपर्क में रहते हैं। बीज की खरीदारी दिल्ली से करते हैं। ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल कर घर में जैविक दवाई तैयार करते हैं। इसका छिड़काव फसलों पर किया जाता है। ट्राइकोडर्मा के छिड़काव से फंगस खत्म होता है।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में रसायनिक खेती के मुकाबले जैविक खेती में पैदावार कम हुई। पैदावार में लगभग 50 फीसदी का अंतर रहा। बावजूद इसके जैविक खेती के प्रति हौसला कम नहीं हुआ। चार साल में जैविक खेती की पैदावार रसायनिक खेती के बराबर हो गई है। उन्होंने बताया कि धान की रसायनिक खेती पर प्रति एकड़ 20,000 हजार रुपये खर्च हो रहा है। जैविक खेती पर प्रति एकड़ 12,000 खर्च हो रहा है। पहली बार सरसों की खेती जैविक तरीके से की थी। शहर से लोगों ने आकर सरसों को हाथों-हाथ खरीद लिया।
जैविक खेती के प्रति कृषि विभाग किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। भविष्य के लिए यह खेती अनिवार्य है। किसान कमल किशोर शर्मा ने जैविक खेती में महारत हासिल की है। इस खेती के प्रति किसी भी जानकारी के लिए कृषि विभाग किसानों के लिए 24 घंटे उपलब्ध है। जैविक खेती के लिए क्षेत्र के किसान कमल किशोर शर्मा से सलाह ले सकते हैं।
अरुण जाराल, उपमंडल कृषि अधिकारी, आरएस पूरा