- 11 लाख से ज्यादा किसानों के नाम पर चल रहे ऋण खाते
- केसीसी पर बकाया लोन भी लगातार बढ़ रहा
गौरव रावत
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के किसानों पर कृषि ऋण का बड़ा बोझ है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में किसानों के ऊपर कुल 11,716 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। यह कर्ज फसल बोने, खाद-बीज खरीदने, सिंचाई और कृषि से जुड़े अन्य कार्यों के लिए बैंकों से लिया गया है। प्रदेश में 11 लाख से ज्यादा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सक्रिय हैं। बीते तीन साल से इनपर भी बकाया लोन बढ़ता जा रहा है।
वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में बताया गया कि प्रदेश के 11.14 हजार किसानों के ऋण खाते चालू हैं। इनमें औसतन प्रति किसान करीब एक लाख रुपये से अधिक का कृषि ऋण बनता है। सरकार के अनुसार सीमांत और छोटे किसान सबसे ज्यादा ऋण लेते हैं। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सर्वे के मुताबिक जमीन का आकार जितना छोटा होता है, किसानों की ऋण निर्भरता उतनी अधिक होती है। जम्मू-कश्मीर में भी यही स्थिति देखी गई है।
कर्जमाफी से सरकार ने किया इन्कार
केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि कृषि ऋण माफी की कोई योजना फिलहाल विचाराधीन नहीं है। सरकार का फोकस किसानों को सस्ता और समय पर ऋण उपलब्ध कराने पर है। इसके लिए केसीसी योजना चलाई जा रही है जिसके तहत तीन लाख रुपये तक का ऋण सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर दिया जाता है। समय पर भुगतान करने पर इसमें तीन प्रतिशत तक की अतिरिक्त छूट भी मिलती है।
-
हर साल उम्मीद बोते हैं, कर्ज काटते हैं....
सांबा जिले की रामगढ़ तहसील के नंदपुरा गांव के किसान विजय चौधरी ने बताया कि खेती की लागत हर साल बढ़ती जा रही है। खासकर कीटनाशकों के दाम इतने अधिक हैं कि फसल बेचकर भी उनकी भरपाई नहीं हो पाती। ऐसे में हमें कर्ज लेना ही पड़ता है। फसल अच्छी भी हो जाए तो बाजार में दाम वैसे नहीं मिलते, जैसे चाहिए। मीरां साहिब के मरालियां गांव के किसान बाबा राम ने कहा कि कभी सूखा तो कभी बेमौसमी बारिश फसल को बर्बाद कर देती है, ऊपर से हर साल फसल बीमा का लाभ भी नहीं मिल पाता। हम हर साल खेत में मेहनत जरूर करते हैं, लेकिन कभी पानी और कभी बीमा हमें पीछे धकेल देता है। उधमपुर जिले के गौरीकुंड के किसान सोमराज का कहना है कि पिछले कई सालों से महंगाई तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसलों के दाम जस के तस हैं। इन हालात में खेती करना आसान नहीं रहा और घाटे से उबरने के लिए हर साल कर्ज लेना पड़ता है। इसी वजह से धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
-
विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा न बने और वे कर्ज के जाल में भी न फंसें। इसके लिए लगातार जन जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
- अनिल गुप्ता, निदेशक, कृषि विभाग, जम्मू
केसीसी योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में बकाया ऋण
वर्ष
केसीसी की संख्या (लाख में)
बकाया ऋण (करोड़ रुपये में)
2021
10.09
6,518
2022
9.34
6,292
2023
9.11 6,363
2024
10.67
6,974
2025
11.13
7,379