- कृषि विभाग ने प्लान किया तैयार, बागवानों को वितरित किए जाएंगे पौधे
- केसर की खेती कर बागवान हो सकेंगे मालामाल, जीआई टैगिंग के बाद बढ़ी कमाई
सतीश वालिया
जम्मू। जम्मू संभाग के किश्तवाड़ के बाद अब रामबन, पुंछ, रियासी, बर्न में केसर उगेगा। इसके लिए कृषि विभाग ने प्लान तैयार किया है। बागवानों को पौधे वितरित किए जाएंगे। केसर की खेती कर किसान आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकेंगे। मौजूदा समय में केसर की पैदावार प्रदेशभर में 14 मीट्रिक टन के करीब है। खेती का दायरा बढ़ने से पैदावार 16 मीट्रिक टन तक पहुंच जाएगी।
कश्मीर घाटी के पंपोर और आसपास इलाकों में केसर की खेती की जाती है। यहां पर करीब 227 गांवों के 12 हजार किसान खेती करते हैं। यहां के केसर को देश-विदेश में भेजा जाता है। वहीं, किश्तवाड़ में कुछ जगहों में केसर की खेती होती है। यहां उगने वाला केसर स्थानीय जरूरत को पूरा करता है।
2022 में जीआई टैगिंग के कारण भी केसर को देश विदेश में पहचान मिली है। इन जगहों से आने वाली डिमांड काफी बढ़ रही है। जरूरत पूरी करने के लिए अब जम्मू संभाग में भी केसर की खेती की जाएगी। यहां पर करीब एक हजार किसान लाभान्वित होगा।
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केसर के क्या है दाम
केसर के दाम मौजूदा समय में ढ़ाई लाख प्रति किलो है। स्थानीय स्तर पर सवा दो लाख रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है। किसानों को उनकी मेहनत के हिसाब से राशि उनके खाते में जमा हो रही है।
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कोट
जम्मू संभाग में भी केसर की अपार संभावनाएं हैं। चार जगहों को चिन्हित किया गया है। इसके लिए प्लान तैयार किया जा रहा है। जल्द ही यहां पर भी खेती होगी।
- एएस रीन, निदेशक, कृषि विभाग