सडक टूटने पर विरोध- प्रर्दशन करते हुए ग्रामीण
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आरएस पुरा। सीमावर्ती गांव शामका से गांव रायपुर सजदा का लिंक मार्ग पर दो महीने पहले डाली गई तारकोल उखड़ गई है। इसके विरोध में रविवार को स्थानीय लोगों ने किसान नेता चौधरी मोहन सिंह के नेतृत्व में पीडब्ल्यूडी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर जल्द से जल्द इस लिंक मार्ग पर तारकोल नहीं डाली गई तो आने वाले दिनों में ग्रामीण पीडब्ल्यूडी के कार्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे। प्रदर्शन में गांव शामका के साथ-साथ अन्य गांव के लोग भी बढ़-चढ़कर शामिल हुए और पीडब्ल्यूडी के खिलाफ नारेबाजी की। किसान नेता चौधरी मोहन सिंह ने कहा कि दो महीने पहले करोड़ों रुपये की राशि खर्च करके इस मार्ग पर तारकोल डाली गई थी, लेकिन दो महीनों के बाद ही तारकोल उखड़ चुकी है। लोगों का यहां से गुजरना तक मुश्किल हो गया है। आए दिन सड़क हादसे भी पेश आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क की हालत खस्ता होने के चलते लोग लगातार मांग कर रहे थे, कि इस सड़क पर तारकोल डाली जाए और तारकोल डाले जाने के बाद लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद तारकोल उखड़ना शुरू हो गई। लोगों का चलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि तारकोल डाल पक्का करने पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। चौधरी ने कहा कि एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। दूसरी तरफ सड़क निर्माण के नाम पर भ्रष्टाचार जारी है, और करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सड़कों की हालत खस्ता बनी हुई है।
स्थानीय निवासी थोडू राम, जयपाल चौधरी तथा बहादुर लाल आदि ने कहा कि अक्टूबर में पीडब्ल्यूडी की तरफ से सड़क पर तारकोल डाली गई थी। उसके उपरांत एक सप्ताह के भीतर ही तारकोल पूरी तरह से सड़क से उखड़ना शुरू हो गई और अब तो सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिस कारण लोगों का आनाजाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि उनका गांव अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ सटा है, और पाकिस्तान की तरफ से लगातार इस क्षेत्र में गोलाबारी भी की जाती है। ऐसे में इस क्षेत्र में सड़कों की हालत को सुधारा होना चाहिए था। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द से जल्द सड़कों की हालत को नहीं सुधारा गया तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा के बीडीसी व डीडीसी आखिर क्या कर रहे हैं। वह लोगों को बेच रहे हैं। उनको चाहिए कि वह सड़क का कार्य आरंभ कराने के बाद यहां पहुंच सड़क टूटने पर इसका समाधान कराते, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस दौरान क्षेत्र के कई ग्रामीणों ने भी विचार रखे।