पारा चढ़ने के साथ ही मच्छर चुनौती बनेंगे। स्वाइन फ्लू के बाद अब मलेरिया और डेंगू के डंक का खतरा बढ़ेगा। स्वास्थ्य महकमे के लिए हर साल एयर और वाटर वार्न रोगों के साथ मलेरिया व डेंगू आफत लेकर आ रहे हैं। संभाग में मानसून की दस्तक के बीच अमरनाथ यात्रा के दौरान इनकी आशंका दोगुनी हो जाती है।
स्टेट मलेरियाजिस्ट डा. गुरजीत सिंह का कहना है कि एंटी लारवा के अलावा मच्छरों को खत्म करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। रियासत में जुलाई के पहले हफ्ते मानसून दस्तक देता रहा है। इस बार मानसून के साथ दो जुलाई से अमरनाथ यात्रा में लाखों यात्रियों का राज्य में आवागमन होगा।
इसके साथ गर्मियों की छुट्टियों के दौरान श्री माता वैष्णो देवी और पर्यटन स्थलों पर भी भारी संख्या में यात्री तथा पर्यटक पहुंचते हैं। इससे डेंगू की आशंका भी बढ़ जाएगी। मानसून में मच्छरों के सबसे ज्यादा हमले होते हैं। मच्छरों के पनपने के लिए शहर के र्कई क्षेत्र संवेदनशील रहे हैं।
इसमें नरवाल यार्ड, वियर हाउस, बस स्टैंड, एसआरटीसी यार्ड आदि शामिल हैं। इनमें मच्छरों को बढ़ावा देने के लिए टायरों में जमा पानी प्रमुख कारण बनता है। वर्ष 2013 में संभाग के कठुआ, सांबा, राजोरी और जम्मू जिले में दो हजार से अधिक डेंगू के पाजिटिव मामले सामने आए थे।
सैकड़ों पीडि़तों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा था। इसमें अनाधिकारिक तौर पर कई लोगों की डेंगू से मौत हो गई थी। हालांकि इन मामलों से सबक लेते हुए सांबा, सरवाल और गांधीनगर अस्पताल में एलिजा टेस्ट की सुविधा मुहैया करवाई गई है।
लेकिन संभाग स्तर पर सिर्फ जम्मू में ही कंपोनेंट लैब होने से प्लेटलेट्स के लिए पीडि़तों को जम्मू आना मजबूरी है।