युद्ध की स्थिति बनने पर सुरक्षा के लिहाज से शहर में ब्लैक आउट का अभ्यास किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई इस माॅकड्रिल ने शहरवासियों के दिलोदिमाग में फिर से भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात को याद करा दिया। लोगों को युद्ध जैसी परिस्थितियों से शारीरिक और मानसिक रूप से बचाव के लिए तैयार करने को ब्लैक आउट किया गया था।
मॉक ड्रिल के दौरान घायलों का इलाज करते कर्मी।
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ब्लैक आउट 22 मिनट तक रहा।ब्लैक आउट के दौरान शहर भर में सड़कों पर पुलिस के फ्लाइंग वाहन सायरन बजाते हुए गुजरते रहे। इस बीच, कुछ वाहन चालकों ने खुद ही वाहनों की लाइट बंद रखी और धीरे-धीरे आगे बढ़े लेकिन रात के समय शहर में अधिकांश प्रतिष्ठान बंद रहे।
मॉक ड्रिल के दौरान घायलों का इलाज करते कर्मी।
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माॅकड्रिल के दौरान सुरक्षा प्रबंधों, आपातकालीन व्यवस्थाओं को जांचा-परखा गया। शहर में लोगों ने घरों के भीतर खुद ही रोशनी बंद रखी।
वमॉक ड्रिल के दौरान घायलों का इलाज करते कर्मी।
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एसडीआरएफ ने जिला जेल के पास हनुमान चौक पर एक सेफ जोन बनाकर माॅकड्रिल की। एसडीआरएफ को अचानक सूचना मिली कि दुश्मन की तरफ से भीषण गोलाबारी कर दी गई है। मकान में रहने वाले चार लोगों के घायल हो गए हैं।
मॉक ड्रिल के दौरान घायलों का इलाज करते कर्मी।
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इसके बाद सक्रिय हुए एसडीआरएफ के जवानों ने त्वरित कार्रवाई कर सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा। इस दौरान सेफ जोन के आस-पास से निकलने वाले दोपहिया व चारपहिया वाहनों को रोका गया।सभी को आपातकालीन स्थितियों की जानकारी देकर संयम बनाए रखने के लिए कहा गया।
युद्ध की स्थिति बनने पर सुरक्षा के लिहाज से शहर में ब्लैक आउट का अभ्यास किया गया।
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हालांकि, अचानक हुई इस ड्रिल से पहले लोगों को समझ नहीं आया, लेकिन बाद में हालात सामान्य हो गए। माॅकड्रिल के दौरान अस्पतालों को भी अलर्ट रखा गया था। इसमें सभी आपात प्रबंधन सक्रिय किए गए थे।