घाटी में बाढ़ प्रभावित इलाकों से सकुशल लौटे बाहरी राज्यों के मजदूरों ने कहा कि घाटी में हालात सुधरने पर वे फिर से वहां रोजी-रोटी के लिए जाएंगे।
पिछले दिनों घाटी पर टूटे कुदरत के कहर ने न सिर्फ कश्मीरियों वरन, दूसरे राज्यों से वहां रोजी-रोटी के लिए आने वाले मजदूरों की जिंदगी पर भी बहुत बुरा असर डाला है।
एनडीआरएफ, सेना के जवानों और स्थानीय लोगों की मदद से जम्मू रेलवे स्टेशन पर सकुशल लौटे मजदूरों ने बताया कि उन्होंने जितने पैसे कमाए थे और जो सामान खरीदा था, सब बाढ़ के पानी में बह गया।
जान बच गई, यही बहुत बड़ी बात है
बिहार के सीतामढ़ी क्षेत्र से चालीस व्यक्तियों के ग्रुप के मंजूर आलम और मोहम्मद लियाकत ने बताया कि वह बारह दिनों तक श्रीनगर के लाल चौक पर अपने किराए के मकान की छत पर फंसे रहे थे। उन्होंने बताया कि सेना के जवानों और स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकले।
अन्य बाढ़ पीडि़त जमैत अख्तर, सोनू अख्तर आदि ने बताया कि उनकी जान बच गई, यही बहुत बड़ी बात है। जहां तक पैसा कमाने की बात है, घाटी के हालात सुधरे तो वे फिर अपने साथियों के साथ वहां रोजी-रोटी के लिए जाएंगे।
बाढ़ में बह गया बहन की निकाह का सामान
बिहार के सीतामढ़ी से ही घाटी में मेहनत-मजदूरी करने आए मोहम्मद सलामउदीन ने बताया कि अगले महीने उनकी बहन का निकाह तय था। उनके ऊपर ही बहन की शादी की जिम्मेदारी थी।
इसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की, ताकि अपनी बहन की शादी अच्छे से कर सकें। उन्होंने बहन के लिए कपड़े और अन्य सामान खरीदे थे, लेकिन सब कुछ बाढ़ के पानी में बह गया। अब उन्हें कुछ नहीं सूझ रहा है कि वे अपनी बहन की शादी कैसे करेंगे।