बांदीपोरा के गुरेज घाटी में नियंत्रण रेखा से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित अति संवेदनशील दो रिफ्यूजी गांवों में आजादी के 75 साल बाद पहली बार बिजली पहुंची। पहली बार बल्ब देख ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। ''कौस्तुभ'' सोलर माइक्रो ग्रिड परियोजना के उद्घाटन के साथ गुरेज घाटी में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ। इस परियोजना का नाम मेजर कौस्तुभ राणे (सेना मेडल) के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने 36 राष्ट्रीय राइफल्स के साथ 2018 के ऑपरेशन के दौरान बलिदान दिया था। परियोजना का उद्देश्य दूरदराज के गांवों को एक भरोसेमंद और टिकाऊ बिजली स्रोत प्रदान करना है।
असीम फाउंडेशन ने पहल करते हुए इन अलग-थलग समुदायों की बिजली की तत्काल आवश्यकता को पूरा किया। नव स्थापित चार किलोवाट सोलर माइक्रो ग्रिड रिफ्यूजी 1 में 121 निवासियों के घरों और 86 की आबादी वाले रिफ्यूजी 2 गाव को सेवा प्रदान करेगा। इस विकास से लाइट, हीटिंग और अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों के लिए लगातार बिजली की पेशकश करके दैनिक जीवन में बदलाव की उम्मीद है।
उद्घाटन समारोह में असीम फाउंडेशन के अध्यक्ष सारंग गोसावी और पंद्रह फाउंडेशन सदस्यों सहित ग्रामीणा उपस्थित थे। कार्यक्रम में मेजर कौस्तुभ राणे के माता-पिता, 50 छात्र और 110 स्थानीय नागरिक भी उपस्थित थे। सभी ने इसे एक मील का पत्थर ठहराया। इस सौर माइक्रोग्रिड का जुड़ना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन गांवों के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो चुनौतीपूर्ण इलाकों में ऐसी परियोजनाओं के मानवीय और रणनीतिक मूल्य दोनों को उजागर करता है।