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जम्मू-कश्मीर में 3 एसपीओ की हत्या के बाद 7 पुलिसकर्मियों ने दिया इस्तीफा

Fri, 21 Sep 2018 12:44 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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एसपीओ जिन्होंने दिया इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर के शोपियां में आज सुबह हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने पहले 3 एसपीओ(स्पेशल पुलिस अफसर) समेत 4 लोगों को अगवा किया और उसके सभी पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी। इस वारदात के बाद घाटी में इतनी दहशत है कि अब तक 7 एसपीओ अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं।

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इस्तीफा देने वालो अफसरों ने वीडियो डालकर इस बात की जानकारी दी है। इन अफसरों में नवाज अहमद लोन, शबीर अहमद ठोकर, नसीर अहमद भट, तजल्ला हुसैन लोन इरशाद बाबा, मुदासिर अहमद व एक अन्य हैं।

क्या है पूरा मामला
जम्मू कश्मीर के शोपियां से शुक्रवार सुबह जिन 3 पुलिसकर्मियों को आतंकियों ने अगवा किया था उनकी हत्या कर दी है, वहीं एक एसपीओ के भाई को रिहा कर दिया है। बताया जा रहा है कि जिन पुलिसवालों का अपहरण हुआ है उनमें 3 एसपीओ यानी स्पेशल पुलिस अफसर थे और एक एसपीओ का भाई है।
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पुलिसवाले शोपियां के दो गांवों से अगवा किए गए हैं जिसमें कापरीन और बतागुंड शामिल हैं। पुलिसवालों के गायब होने के बाद उन्हें ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

बता दें कि बीते दिनों हिजबुल मुजाहिदीन के मुखिया रियाज नेको ने कश्मीर के स्पेशल पुलिस अफसरों को आगाह किया था कि वह अपनी नौकरी छोड़ दें। आतंकी संगठन ने फिलहाल एसपीओ पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया है और सियासी कार्यकर्ता भी निशाने पर हैं।

शोपियां में जो तीन पुलिसकर्मी और 1 नागरिक अगवा किए गए हैं उनकी पहचान एसपीओ फिरदौस अहमद, एसपीओ कुलदीप सिंह, एसपीओ निसार अहमद धोबी, फयाज अहमद भट(निसार अहमद का भाई) के रूप में हुई है।

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क्या बोलीं महबूबा मुफ्ती, पंचायत चुनाव से है कनेक्शन

तीन एसपीओ की हत्या - फोटो : अमर उजाला
तीन पुलिसकर्मियों को अगवा करने और फिर उनकी हत्या किए जाने के मामले में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया है कि तीन और पुलिसकर्मी आतंकियों की गोली का शिकार हो गए। हम सब इस पर शोक, गुस्सा, हैरानी व सांत्वना व्यक्त करेंगे। दुर्भाग्य से इससे मृतकों के परिवार को कोई शांति नहीं मिलती।

महबूबा ने अगले ट्वीट में लिखा कि, पुलिसकर्मियों के अपहरण की बढ़ती घटनाओं से ये साफ होता है कि केंद्र सरकार की बल प्रयोग करने की नीति काम नहीं आ रही है। इसका हल अब सिर्फ बातचीत ही नजर आता है।
आतंकियों की इस हरकत को पंचायत चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आतंकी नहीं चाहते कि राज्य में पंचायत चुनाव हो। यही वजह है कि पंचायत चुनाव की घोषणा के मात्र 24 घंटे के अंदर चार पंचायत घरों को आग लगा दी गई थी जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं। ऐसे में इस तरह पुलिसकर्मियों का गायब होना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल है।
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