जम्मू स्थित बाजार में रखा ड्राईफ्रूट।
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अफगानिस्तान में बदले हालात का असर जम्मू-कश्मीर के कारोबारियों पर भी पड़ने लगा है। तालिबान के कब्जे के बाद वहां से आयात होने वाला ड्राई फ्रूट की सप्लाई प्रभावित हो गई है।कई कारोबारियों का मानना है कि इसका असर आम लोगों पर भी पड़ेगा। जम्मू-कश्मीर के कारोबारी अफगानिस्तान से पिस्ता, बादाम, अंजीर, अखरोट जैसे कई प्रकार के ड्राई फ्रूट्स मंगाते हैं।
बताया जा रहा है कि तीन महीने से अफगानिस्तान में मची अफरा-तफरी से आयात सुचारु नहीं हो पा रहा है। इस वजह से जम्मू संभाग के साथ-साथ कश्मीर में भी सूखे मेवे की किल्लत होने लगी है। इस वजह से कई जगहों पर इसके बाद दाम बढ़ने लगे हैं।
दिवाली पर हो सकती है दिक्कत
भारत सूखे मेवे का सबसे ज्यादा आयात अफगानिस्तान से करता है।
तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद सूखे मेवे, शहतूत और बादाम की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
लॉकडाउन में प्रभावित हुआ था कारोबार
कोरोना के कारण मेवा (ड्राई फ्रूट्स) कारोबार की सबसे बड़ी थोक नरवाल मंडी प्रभावित रही थी। इस दौरान सभी प्रकार काम ठप पड़ गए थे। थोक के अलावा ड्राई फ्रूट के खुदरा बाजार पर भी असर पड़ा था। कारोबारियों के अनुसार पिछले दो साल से जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों का रुख कम होने के कारण व्यापार प्रभावित रहा। लंबे समय तक पर्यटन स्थलों के न खुलने से भी कारोबार पर असर पड़ था।
पाकिस्तान और अन्य देशों से आता में माल
अखरोट, अखरोट गिरी और बादाम पर निर्भर नरवाल की ड्राई फ्रूट मंडी में देश भर से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी मेवा आता है। खासकर चिली, पाकिस्तान, चीन और कैलिफोर्निया से। नरवाल फ्रूट मंडी एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक विदेशों से भी बड़ी मात्रा में ड्राईफ्रूट आयात होता है।
स्थानीय चीजों की की डिमांड ज्यादा
जम्मू कश्मीर ड्राईफ्रूट बाजार का प्रमुख अंग होने के साथ उत्पादक राज्य भी है। यहां अखरोटों का बड़ी संख्या में उत्पादन होता है। इसकी मांग भी अन्य के मुकाबले ज्यादा है। अमरनाथ यात्रा और वैष्णो देवी आने वाले श्रद्धालु स्थानीय उत्पाद की सबसे ज्यादा डिमांड करते हैं।