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जम्मू-कश्मीर में निपाह वायरस को लेकर बढ़ाई सतर्कता, स्वास्थ्य निदेशालय ने जारी की एडवाइजरी

Thu, 13 Jun 2019 03:29 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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निपाह वायरस - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर में निपाह वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। जिला अस्पतालों को इस वायरस को लेकर स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है। अस्पताल प्रशासन की ओर से ऐसे संदिग्ध मरीजों पर नजर रखी जा रही है। ऐसे मरीजों की स्वास्थ्य निदेशालय को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। हालांकि, अभी तक निपाह वायरस का राज्य में कोई मामला सामने नहीं आया है। 

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दक्षिण भारत के केरल में निपाह वायरस से कई लोगों की जान जा चुकी है। पिछले साल केरल में कई लोग इस वायरस की चपेट में आए थे, जिसके बाद सभी राज्यों में अलर्ट जारी किया गया था। इस साल भी कई संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए हैं। पर्यटन स्थल होने के कारण जम्मू और कश्मीर में देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। 

खासतौर पर कश्मीर में निपाह वायरस को लेकर ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है। एक जुलाई से अमरनाथ यात्रा भी शुरू हो रही है, जिसमें लाखों शिव भक्त पहुंचते हैं। इसमें केरल से भी बड़ी संख्या में यात्री आते हैं। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉ. समीर मट्टू के अनुसार राज्य में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि इससे निपटने के लिए सभी जरूरी प्रबंध किए गए हैं। लोग फलों को पूरी तरह से साफ कर खाएं। 
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निपाह वायरस को एन्सेफलाइटिस भी कहा जाता है। यह वायरस टेरोपस जींस नाम के एक खास नस्ल से फैलता है। यह चमगादड़ों के मूत्र में, उसकी लार और शरीर से निकलने वाले द्रव में मौजूद रहते हैं। यह एक व्यक्ति में पहुंचकर उसके संपर्क में आने वाले दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर देता है। 

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लक्षण 
  • बुखार के साथ सिर में दर्द (सिर में बुखार चढ़ना)।
  • थकान, मानसिक परेशानी, दिमाग में सूजन आना।  
  • निपाह वायरस के रोगी 24-48 घंटे में कोमा जा सकते हैं, या फिर मौत हो सकती है।
  • पीड़ित की मौत की पचास फीसदी आशंका रहती है।
  • इंफेक्शन के शुरुआती दौर में सांस लेने में दिक्कत होना।
  • पीड़ितों में न्यूरोलाजिकल परेशानी होना।

बचाव 
  • संक्रमित व्यक्ति को आइसोलेट करें और उससे दूरी बनाए रखें।
  • तेज बुखार होने पर निकटतम चिकित्सा केंद्र में पूरा इलाज कराएं।
  • फलों को पूरी तरह से साफ और धोकर सेवन करें, पहले से कटे और खराब फल न लें।
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