जम्मू। गुज्जर और बक्करवाल समुदाय के लोगों के पिछड़ेपन का मुख्य कारण सारक्षता की कमी है। इसके चलते इन्हें प्रतियोगिताओं में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण इनका उत्थान नहीं हो पा रहा है। यह बात गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के स्कॉलर और ट्राइबल रिसर्च एंड कल्चरल फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. जावेद राही ने कही।
केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में गुज्जर-बक्करवाल समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के 29 वर्ष पूरे होने पर डॉ. जावेद राही ने कहा कि प्रदेश में इस समुदाय को राज्य के अन्य समुदायों के बराबर लाने के लिए बहुत से प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने समुदाय के लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति में बदलाव होने और उसके बाद समय-समय पर जारी हुए आदेश समुदाय के लिए फायदेमंद हैं। मगर योजनाओं, कानूनों और सरकार के कार्यक्रमों का फायदा लेने के लिए सबसे पहले शिक्षा लेनी होगी। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा ही गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के लोगों का भाग्य बदल सकती है।