घगवाल। राजपुरा व घगवाल में स्थित सरकारी कार्यालय आज भी निजी इमारतों में चल रहे हैं। इनके लिए आज तक कोई भूमि चिह्नित नहीं हो पाई हैं।
बात करें घगवाल की, तो घगवाल में तहसील कार्यालय, नायब कार्यालय, कृषि विभाग, सोशल वेलफेयर कार्यालय सहित कई ऐसे कार्यालय हैं जो निजी या किसी कार्यालय में जैसे तैसे करके काम चला रहे हैं। वहीं बात की जाए राजपुरा तहसील की, तो वहां तहसील कार्यालय सहित दर्जनों की संख्या में प्रशासनिक कार्यालय किराए की इमारतों में चल रहे हैं। इस कारण हजारों रुपये किराए में जा रहे हैं। खंड विकास कार्यालय राजपुरा के पंचायत घर में है, नहीं तो किराए का आंकड़ा लाखों पार करता।
चक दुल्मा के सरपंच विनय शर्मा, रूप चंद, विकास कुमार आदि ने बताया कि 2014 में राजपुरा को तहसील का दर्जा मिला, जो अभी तक किराए की इमारत में ही चल रहा है। वहीं कृषि विभाग के कार्यालय का उद्घाटन हुआ था। वह भी अभी तक किराए के भवन में चल रहा है। पशु चिकित्सा केंद्र भी किराए दो दुकानों में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग भी किराए के मकान और दुकान में चलाया जा रहा है। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग उठाई है कि सरकारी कार्यालयों के लिए भूमि चिह्नित की जाए, ताकि आम लोगों को भी राहत मिले। ------------
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घगवाल व राजपुरा में कई कार्यालय निजी इमारतों में चल रहे हैं। कुछ विभागों के कार्यालय हैं ही नहीं, जिसको लेकर घगवाल वासियों में रोष है।
-विजय टगोत्रा, बीडीसी अध्यक्ष, घगवाल
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राजपुरा में सरकारी जमीन कम है, केंद्र सरकार के मंत्रियों से भी आग्रह किया कि अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद कस्टोडियन विभाग को बंद करना चाहिए और कस्टोडियन जमीन को सरकारी जमीन घोषित कर देना चाहिए ताकि सरकारी कार्यालय बनाए जा सके।
-राधा कृष्ण, बीडीसी अध्यक्ष, राजपुरा
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सरकारी कार्यालय बनाने के लिए घगवाल में करीब 36 कनाल जमीन लोगों ने दी थी, लेकिन वहां कुछ नहीं बनाया गया। जो सरकारी कार्यालय हैं आज भी निजी इमारतों में किराए पर चल रहे हैं यह प्रशासन की कैसी मजबूरी है।
-रामपाल शर्मा, समाजिक कार्यकर्ता
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राजपुरा में मदुन गांव के पास सरकारी जमीन को तहसील कार्यालय बनाने के लिए चिह्नित कर लिया गया है। इस बारे में कार्रवाई चल रही है। जल्द ही सार्थक परिणाम सामने आएंगे।
-रामकेश शर्मा, एसडीएम घगवाल