राजोरी जिले के ढांगरी गांव में अल्पसंख्यक हिदुओं पर दोहरे आतंकी हमले के बाद नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे राजोरी व पुंछ जिले में सीआरपीएफ की अतिरिक्त 20 कंपनियाें की तैनाती शुरू हो गई है। दो हजार से ज्यादा जवानों को अल्पसंख्यकों की आबादी वाले संवेदनशील इलाकों में भेजा जा रहा है।
सीआरपीएफ के आईजी समेत अन्य आला अफसर इस विशेष तैनाती की निगरानी कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीआरपीएफ की 20 कंपनियों में दो हजार से अधिक जवान होते हैं। भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे राजोरी और पुंछ जिले आतंकवाद के शुरुआती दौर में खासे प्रभावित रहे।
ढांगरी गांव में दोहरे हमले में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के दो बच्चों समेत छह लोगाें की जान चली गई। 11 लोग घायल हो गए। इसके बाद से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग उठाई जा रही है। केंद्र ने विशेष तैनाती का फैसला लिया है, जिसके तुरंत बाद दोनों ही संवेदनशील जिलों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती शुरू की गई है।
राजोरी में 1990 के दशक में भी इस तरह की घटनाएं होती थीं। धीरे धीरे राजोरी और पुंछ में आतंकवाद कम होता गया और सुरक्षाबलों की तैनाती में कमी की गई। यहां तक कि विलेज डिफेंस कमेटियों के लोगों से हथियार भी ले लिए गए।
इन कमेटियों को दोबारा बहाल करने की मांग उठी थी। लोगों ने यहां तक कहा कि सुरक्षा एजेंसियों सुरक्षा नहीं कर पा रही हैं तो लोगों को हथियार दिए जाएं ताकि वह अपनी जानों की खुद हिफाजत कर सकें।