अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) में मरीजों के इलाज में मनमानी पर राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) ने सख्त रुख दिखाते हुए चार निजी अस्पतालों का पैनल निलंबित कर दिया है।
इनमें श्रीनगर का शिफा मेडिकल सेंटर, फ्लोरेंस अस्पताल, जम्मू का अंकुर मैत्रिका अस्पताल, सूद आई केयर सेंटर शामिल हैं। वहीं, कैशलेस उपचार नहीं देने पर उधमपुर के केएलएसएम रोटरी आई अस्पताल पर 50,000 रुपये का लगाया है। अधिकारियों ने बताया कि अंकुर मैत्रिका अस्पताल पर 10,27,500 रुपये जुर्माना लगाया गया है। अस्पताल के पैनल को छह महीने के लिए निलंबित किया गया है। शिफा मेडिकल सेंटर पर 26,15,000 रुपये के जुर्माने के साथ छह महीने किया गया है। वहीं, सूद आई केयर सेंटर पर छह महीने की रोक लगाई गई है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस में बताया गया है कि इन अस्पतालों ने लाभार्थियों के इलाज के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया। हालांकि, यह साफ किया गया है कि निलंबित अस्पताल योजना के तहत डायलिसिस सेवाएं प्रदान करना जारी रखेंगे। केएलएसएम रोटरी आई हॉस्पिटल के बारे में बताया गया कि अस्पताल ने एक लाभार्थी को कैशलेस उपचार प्रदान नहीं किया। इससे मरीज को अपनी जेब से 10,000 रुपये का खर्च करने पड़े। राज्य पैनल समिति (एसईसी) की बैठक के दौरान अस्पताल की मनमानी को पेश किया गया था। अस्पताल पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला किया गया।
वहीं शिफा मेडिकल सेंटर के निरीक्षण के दौरान लाभार्थियों से बातचीत में अस्पताल के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने की बात सामने आई थी। इसमें रोगियों को जेब से खर्च करने के लिए मजबूर करने और उपचार से इन्कार करने जैसे आरोप शामिल थे। जम्मू के सूद आई केयर सेंटर ने भी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया था। फ्लोरेंस अस्पताल के निरीक्षण में लाभार्थियों को कैशलेस इलाज देने से इन्कार की बात सामने आई थी। अंकुर मैत्रिका अस्पताल के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई।