अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दहशतगर्दी के खिलाफ बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सदन में सोमवार को सुरक्षा चूक, आतंकियों के परिवारों के खिलाफ कार्रवाई और स्टेटहुड के मुद्दे भी उठे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने पहलगाम आतंकी हमले में सुरक्षा चूक, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र का मुद्दा उठाया। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाली, आतंकियों के परिवारों और रिश्तेदारों पर कार्रवाई, कश्मीर में घरों को गिराने आदि के मुद्दे भी उठे। कई ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की वकालत की।
यह आखिरी हमला होना चाहिए-उपमुख्यमंत्री
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले पर कुछ कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। जम्मू कश्मीर ऐसा राज्य रहा है यहां शेर और बकरी ने एक साथ एक तलाब में पानी पिया है। महात्मागांधी ने भी माना था कि मुझे जम्मू कश्मीर में ही रोशनी की किरण दिख रही है। हमने विकट परिस्थितियों में भी अपनी विरासत और भाईचारे को कायम रखा है। हमले की तस्वीरों ने सबको झकझोर कर रख दिया है। सबकी आंखों में आंसू छलके हैं। लेकिन अब यह आखिरी हमला होना चाहिए। नेकां के भी कई विधायक, मंत्री और कार्यकर्ता आतंकवाद की भेंट चढ़े हैं।
जम्मू कश्मीर के लोगों ने आतंकवाद को जवाब दिया: सुनील
नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर धरती पर स्वर्ग है, जहां लोग अपने जीवन के सुखद पल बिताने आते हैं। इस अमानवीय कृत्य से पूरी मानवता बिखर गई है और पूरा देश शोक और सदमे में है। इस कठिन समय में आतंकवादियों के इन नापाक इरादों को असफल बनाने के लिए एकजुट आवाज की जरूरत है। इस भयानक त्रासदी के पीड़ित परिवारों के नुकसान की भरपाई शब्दों में नहीं की जा सकती, लेकिन सदन देश को यह संदेश देना चाहता है कि जम्मू-कश्मीर के लोग इस अमानवीय घटना से बहुत आहत हैं और देशभर के सभी पीड़ित परिवारों के साथ अपनी संवेदनाएं साझा करते हैं। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने इस जघन्य कृत्य की निंदा करते हुए भाईचारे और एकता का परिचय देकर आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। हमें सुरक्षाबलों, सरकार का हौसला कम नहीं करना चाहिए।
अमरनाथ बेस कैंप जैसे संवेदनशील इलाके में आतंकी हमला सुरक्षा चूक: मीर
कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष जीए मीर ने कहा कि हम सभी पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हैं। आतंकियों ने एक साजिश के तहत ऐसा हमला करके अपने एजेंडे को लाने पर जोर दिया है। लेकिन हमें उनके एजेंडे को नहीं मानना है। वर्तमान में जम्मू कश्मीर सरकार के पास कानून व्यवस्था का जिम्मा नहीं है और केंद्र को इस पर सोचना चाहिए। अनुच्छेद 370 को निरस्त करके आतंकवाद को हराने की बात कही गई थी। लेकिन अब भी यह कायम है। अमरनाथ बेस कैंप जैसे संवेदनशील पहलगाम में आतंकी हमला सुरक्षा चूक भी है। सुरक्षा एजेंसियों के पास हमले के लिए इनपुट थे, तो फिर उचित कदम क्यों नहीं उठाए गए। इसे गृह मंत्री ने भी माना है। उपराज्यपाल को सुरक्षा को गंभीरता से लेना चाहिए।
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आदिल हुसैन जैसा सबको बनने की जरूरत: सज्जाद
जम्मू कश्मीर पीपुल्स कान्फ्रेंस के विधायक सज्जाद गनी लोन ने कहा कि जम्मू कश्मीर 35 साल लोगों ने कहीं न कही हिंसा का सामना किया। लेकिन अब इस तरह की हिंसा को पूरी तरह से नकार दिया है। अब माहौल बदला है। सबने पहलगाम आतंकी हमले पर गुस्से का इजहार किया है। लेकिन हमले की आड़ में निर्दोष लोगों को तंग न किया जाए। हम सभी को शहीद सईद आदिल हुसैन शाह की तरह बनने की जरूरत है। बाहरी राज्यों में कश्मीरी छात्रों को निशाना न बनाया जाए। सरकार को मारे गए लोगों के परिवारवालों को किसी न किसी तरह से मदद देनी चाहिए। हमने खुद आतंकवाद की मार झेली है। सदन के कई सदस्य इसका शिकार हुए हैं।
कश्मीर में बुलडोजर से मकान गिराना गलत: तारीगामी
सीपीआई (एम) के विधायक एमवाई तारीगामी ने कहा कि इस हमले से आतंकियों ने अपने एजेंडे को इंसानियत पर थोपने की कोशिश की है। आतंकियों की नजर में सिर्फ टेरर फैलाना ही सबकुछ है। अहम फैसलों में हितधारकों को शामिल करके आतंकवाद पर काबू पाना मुश्किल है। मीडिया को अपनी जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। हमले के बाद कश्मीर में बुलडोजर चलाए जा रहे हैं, मकान गिराए जा रहे हैं, जो गलत है। सर्वोच्च न्यायालय कहता है कि सबको छत का अधिकार है। एक आतंकी के मां, बाप, बेटा, बेटी या अन्य किसी को उसके लिए जिम्मेदार ठहराया नहीं जा सकता है। यह तरीका गलत है और इससे दर्द बढ़ेगा। कानून व्यवस्था कायम रहे। भाजपा की 2014 से सरकार है और पहले ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कई मंत्रिमंडल के सदस्य भी नहीं रोक पाए थे आंसू
पहलगाम से नेकां विधायक अल्ताफ अहमद कुल्लू ने कहा 25 साल बाद पहलगाम आतंकी हमले जैसी बड़ी घटना हुई है। इस हमले पर मंत्रिमंडल के कई सदस्य अपने आंसू नहीं रोक पाए थे। उस समय घटनास्थल और आसपास 1000 तक पर्यटक मौजूद थे, जिन्हें कश्मीरियों ने बचाने का काम किया।आदिल हुसैन की कुर्बानी कश्मीरियत की मिसाल है। 36 साल बाद पूरा जम्मू कश्मीर ऐसे हमले पर एक साथ खड़ा हुआ है। बाहर कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को गृह मंत्रालय हस्तक्षेप करे।
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अगर जंग ही हल तो हम समर्थन करते: मुजफ्फर
निर्दलीय विधायक मुजफ्फर इकबाल खान ने कहा कि हम जंग का समर्थन नहीं करते हैं। लेकिन अगर पहलगाम जैसे बड़े आतंकी हमलों को भविष्य में रोकने का कोई हल नहीं बचता है तो हम जंग के समर्थन में हैं। कश्मीर में लोगों के घरों को न उड़ाया जाए दोषी को सजा दी जाए। पुलिस हिरासत में अत्याचार बढ़ा है। अचानक देश छोड़ने के फरमान से दर्जनों परिवार प्रभावित हुए हैं।
मारे गए लोगों को शहीदों का दर्जा दें: पर्रा
पीडीपी के विधायक वाहिद उर रहमान पर्रा ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को शहीदों का दर्जा दिया जाए। तीन दशक में पहली बार किसी आतंकी हमले पर पूरा जम्मू कश्मीर एक साथ खड़ा हुआ है।
गुलाम रसूल की मौत की उच्च स्तरीय जांच हो: खुर्शीद
विधायक खुर्शीद अहमद ने कुपवाड़ा में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा मारे गए सामाजिक कार्यकर्ता गुलाम रसूल मारगे की मौत की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की। इसको लेकर उन्होंने सचिवालय में तख्ती पकड़कर प्रदर्शन किया। कहा, जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल किया जाए, जिससे आंतरिक सुरक्षा और मजबूत हो सके। तीन दशक से अधिक समय बाद पूरे जम्मू कश्मीर के लोग एक साथ बाहर आए हैं।
पाक को गोली का जवाब गोली से दें: मेहराज
डोडा विधायक मेहराज मलिक ने कहा कि पाकिस्तान को गोली का जवाब गोली से देना चाहिए। जम्मू कश्मीर को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। अगर पाकिस्तान पर हमले की जरूरत है तो हमें पीछे नहीं हटना चाहिए।
लोगों से एकता और भाईचारे की अपील
स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने लोगों से एकता और भाईचारे को कायम रखने की अलील की। उन्होंने कहा कि हमने दुनिया को पैगाम दिया है कि जम्मू कश्मीर में हम सभी आतंकवाद के खिलाफ हैं।
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आतंकी हमले में मारे गए लोगों के नाम बाद में प्रस्ताव में किए शामिल
प्रस्ताव में पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए सभी 26 लोगों के नाम शामिल किए गए। पहले ये नाम प्रस्ताव में शामिल नहीं थे। सभी नामों को शामिल करने के लिए विधायक सज्जाद गनी लोन ने कहा। नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने भी नाम शामिल करने को कहा। इस पर स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि जब प्रस्ताव तैयार हो रहा था, तब नाम उपलब्ध नहीं थे। बाद में इन्हें शामिल किया गया। सभी नामों को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पढ़ा। उमर ने सदन में सभी लोगों को नाम बोलकर श्रद्धांजलि दी। इसमें विनय नरवाल, एन. रामचंद्रन, दिनेश अग्रवाल, अतुल श्रीकांत मोनी, नीरज उदवानी, समीर गुहा, सुशील नथ्याल, संजय लक्ष्मण, सुदीप नोपानी, बिटेन आदिकारी, मंजूनाथ राव, दिलीप देसाले, प्रशांत सतपति, मुनीश रंजन, सैयद आदिल हुसैन शाह, जेएस चंद्र मौली, मधुसूदन राव, संतोष जगदाई, कस्तोबा गनोवोटा, हेमंत सुहास जोशी, शुभम द्विवेदी, भारत भूषण, सुमित परमार, यतीश परमार, तागे हलिंग और शैलेश भाई शामिल हैं।