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AK-47, पिस्तौल और ग्रेनेड सप्लाई का आरोप: हिजबुल कमांडर से मिले थे 20 लाख, आतंकी फंडिंग केस में जमानत नामंजूर

Sun, 10 May 2026 11:25 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू की एनआईए विशेष अदालत ने हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-ताइबा के मददगार आरोपी शाहीन अहमद लोन की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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judge court हथोड़ा - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित संगठनों हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-ताइबा के मददगार को जमानत से इन्कार कर दिया है। आरोपी शाहीन अहमद लोन पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी का भी आरोप है।

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एनआईए कोर्ट जम्मू के स्पेशल जज प्रेम सागर ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इन मामलों में जमानत नियम है और जेल अपवाद का सामान्य सिद्धांत लागू नहीं होता। जिला बारामुला के कनिस्पोरा गांव निवासी शाहीद ने अपनी पत्नी नसरीना अख्तर के यह अर्जी दायर की थी। केस रिकॉर्ड के अनुसार मामला 11 जनवरी, 2020 का है।

श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर लगाए नाके पर एक कार को रोका गया। आरोप है कि इसमें हिजबुल आतंकी सैयद नवीद मुश्ताक और रफी अहमद राथर के साथ आरोपी देवेंद्र सिंह और इरफान शफी मीर सवार थे। कार से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद हुए। इनमें एक एके-47 राइफल, तीन पिस्तौल और एक हैंड ग्रेनेड शामिल था। पहले केस काजीगुंड थाने में दर्ज किया गया, जिसे बाद में एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया।
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एनआईए का आरोप है कि आरोपी को हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक खरीदने के लिए शोपियां में हिजबुल के तत्कालीन जिला कमांडर सद्दाम पाडर से 20 लाख रुपये मिले थे। उसने सोपोर और बारामुला के ओवरग्राउंड वर्करों के जरिये सोपोर में सक्रिय लश्कर आतंकियों को पांच एके-47 राइफलें, 10 पिस्तौल और 10 हैंड ग्रेनेड दिए थे। उस पर बारामुला में सक्रिय आतंकी को नौ लाख रुपये देने का भी आरोप है।

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इस आधार पर मांगी जमानत
आवेदक ने तर्क दिया कि वह सितंबर, 2020 से हिरासत में है और मुकदमे में देरी हुई है। दलील है कि 164 गवाहों में से केवल कुछ ही गवाहों की जांच की गई है। उसके कब्जे से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी की लगातार हिरासत अनिश्चितकालीन कारावास के बराबर होगी। वहीं, एनआईए के वकील ने दलील दी कि इकट्ठा की सामग्री आरोपी की आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता दर्शाती है। आवेदक पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप हैं। यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर लगी रोक उस पर लागू होती है।

अदालत ने इस आधार पर खारिज की अर्जी
अदालत ने एनआईए के आरोपी के खिलाफ मौखिक और दस्तावेजी सबूतों को जमानत न देने के लिए पर्याप्त पाया। लंबे समय से जेल में बंद होने की दलील को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि मुकदमा पहले से ही चल रहा है। गवाहों की नियमित जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। जमानत दी तो तो आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
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