इस आधार पर मांगी जमानत
आवेदक ने तर्क दिया कि वह सितंबर, 2020 से हिरासत में है और मुकदमे में देरी हुई है। दलील है कि 164 गवाहों में से केवल कुछ ही गवाहों की जांच की गई है। उसके कब्जे से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी की लगातार हिरासत अनिश्चितकालीन कारावास के बराबर होगी। वहीं, एनआईए के वकील ने दलील दी कि इकट्ठा की सामग्री आरोपी की आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता दर्शाती है। आवेदक पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप हैं। यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर लगी रोक उस पर लागू होती है।
अदालत ने इस आधार पर खारिज की अर्जी
अदालत ने एनआईए के आरोपी के खिलाफ मौखिक और दस्तावेजी सबूतों को जमानत न देने के लिए पर्याप्त पाया। लंबे समय से जेल में बंद होने की दलील को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि मुकदमा पहले से ही चल रहा है। गवाहों की नियमित जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। जमानत दी तो तो आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है।