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मां के अंतिम संस्कार में जा रहा था सैन्यकर्मी दलजीत, सड़क हादसे में हो गई मौत

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जम्मू। अपने तैनाती स्थल से घर लौट रहे सैन्यकर्मी दलजीत सिंह नियति के क्रूर खेल का शिकार हो गए। झज्जर कोटली में नंदिनी के पास हुए भीषण हादसे में जान गंवाने वाले दलजीत अपनी मां की अर्थी को कंधा देने तरनतारन स्थित घर जा रहे थे। लेकिन बीच राह वे खुद भी मौत के घाट उतर गए। दलजीत सिंह कारगिल जिले में तैनात थे। दो दिन पहले ही उन्हें पता चला कि मां का निधन हो गया है। दलजीत ने इसकी जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों को दी। आपातकालीन सेवा में छुट्टी मिलने पर वे पहले श्रीनगर पहुंचे जहां से जाइलो वाहन में जम्मू की ओर निकले। लेकिन मां की मौत से गमगीन दलजीत सिंह नहीं जानते थे कि वे खुद भी मौत का शिकार हो जाएंगे। दलजीत का एक भाई भी है। दलजीत ने जम्मू में एक पुलिसकर्मी का नंबर लेकर इसकी जानकारी प्राप्त की।
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आतंकी हमलों के डर से जम्मू लौट रहे थे सभी मजदूर
झज्जर कोटली हादसे में मारे गए मजदूरों के साथ भी नियति ने अजब खेल खेला। घाटी में गैर प्रांतीय श्रमिकों को आतंकियाें द्वारा निशाना बनाए जाने से दहशत के चलते आठ मजदूर आनन फानन घर के लिए निकले। लेकिन जम्मू पहुंचने से पहले ही मौत ने उनकी सांसें भी रोक दीं।

जानकारी के अनुसार बिहार के रहने वाले मजदूर श्रीनगर में दिहाड़ी लगाकर अपनी रोजी रोटी कमा रहे थे। लेकिन कुलगाम में आतंकियों द्वारा छह मजदूरों की हत्या कर देने के बाद श्रीनगर में काम करने वाले मजदूरों में दहशत हावी हो गई। वह कश्मीर छोड़कर अपने घरों को जा रहे हैं। यह मजदूर भी डर कर अपनी जान बचाते हुए अपने घरों को लौट रहे थे। लेकिन मौत ने इनका पीछा नहीं छोड़ा और सड़क हादसे में जान चली गई।
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मृतक तीनों मजदूरों के शव जीएमसी के शवगृह रखे गए हैं। अभी इनका पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ। क्योंकि इनके परिजनों के आने तक पोस्टमार्टम नहीं किया जा सकता। पुलिस ने उन मजदूरों के घर पर संदेश दे दिया है, जिनकी पहचान हो पाई है या फिर जो थोड़ी बहुत बात कर सकते हैं।
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