ज्यौड़ियां। क्षेत्र में बुधवार सुबह बारिश के साथ तेज हवा चली। इस दौरान एक पेड़ बिजली के तारों पर गिर गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। पेड़ गिरने के साथ ही एक खंभा भी गिरा है जिससे करीब 12 गांवों की बिजली 11 घंटे से अधिक देर तक प्रभावित रही।
बुधवार सुबह तेज हवार के साथ ही बारिश शुरू हो गई। तेज हवा के चलते वार्ड-7 में एक पेड़ बिजली की तारों पर गिर गया। इसके साथ ही एक खंभा भी गिर गया। इससे बिजली का ढांचा तहसनहस हो गया। खंभा गिरने से ज्यौडियां के गांव पोठा, कडेंयाल, तरेयाई, मडींवाला, रतनपुर, मैरा, मुट्ठी, चककमोड, वदोंवाल, जडभगता, तरेयाई, मडींवाला सहित करीब 12 गांवों की बिजली बंद हो गई। बिजली विभाग को बिजली व्यवस्था को सुचारु करने में 11 घंटे से भी अधिक समय लग गया। शाम चार बजे तक बिजली बंद रही।
इस विषय में पब्लिक ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रमुख अमृत भूषण बाबा भारती ने बताया कि ज्यौड़ियां में बिजली ढांचे को देखकर ऐसा लग रहा है कि तेज हवार का केंद्र वार्ड नंबर-7 रहा है। अन्य किसी क्षेत्र में इस तरह का समाचार नहीं मिला है। गौरतलब है कि इस तेज हवा ने बिजली विभाग द्वारा हाल ही में कराए गए कार्य की पोल खोल दी है। ज्ञात रहे कि यह खंभे और ट्रांसफार्मर पिछले साल ही लगाए गए हैं। जब यह कार्य चल रहा था, अगर उस समय इसको ठीक से चेक किया जाता तो आज यह तबाही नहीं होती।
बारिश से आरएस पुरा में मौसम हुआ सुहाना
आरएस पुरा। क्षेत्र में बुधवार सुबह दो घंटे झमाझम बारिश के चलते मौसम सुहाना बना रहने के साथ लोगों को पड़ रही गर्मी से कुछ राहत मिली। क्षेत्र में तीन दिन से पड़ रही उमस के चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। सुबह दिन निकलने के साथ मौसम के करवट लेने पर क्षेत्र में तेज हवाएं चलने लगीं।
धीरे-धीरे पूरा आसमान काले बादलों से छा गया। थोड़ी देर बाद मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। जो दो घंटे तक होती रही। दो घंटे तक हुई जबरदस्त बारिश के चलते किसानों को भी काफी हद तक राहत मिली। किसान धर्मपाल, ओम प्रकाश का कहना है कि इन दिनों खेतों में लगी धान की फसल के लिए बारिश बेहतर है। उन्होंने कहा कि इस समय किसानों को उप जिले में नहरी पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही और किसान बारिश पर ही निर्भर हैं। संवाद
किसानों को धान की फसल के अंतिम पड़ाव तक पहुंचने की उम्म्मीद
अरनिया। कहावत है कि अगर एक द्वारा बंद हो जाए तो ऊपर वाला दूसरा द्वार खोल देता है। इस बार किसानोें के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ है।
किसान मदन लाल, गुरदीप सिंह, सोम राज, ओम प्रकाश, सोनू पंडित व रघुवीर सिंह आदि का कहना है कि करीब डेढ़ माह पहले जब क्षेत्र की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि को सींचने के लिए नहर विभाग द्वारा बनाया गया साइफन क्षतिग्रस्त हो गया। तो लगा गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारी धान की फसल तबाह हो जायेगी। फर्क सिर्फ इतना कि गत वर्ष आंधी व ओलावृष्टि से फसल खराब हुई थी, जबकि इस वर्ष सूखे की चपेट में आकर फसल खराब हो जाएगी, मगर कहावत है कि जब एक द्वार बंद होता है तो ऊपर वाला दूसरा द्वारा खोल देता है। दूसरे द्वार के रूप में हमारी फसल बचाने के लिए समय-समय पर बारिश होती रही। बुधवार सुबह हुई बारिश से हमें पूरी उम्मीद है कि अब धान की फसल अंतिम पड़ाव तक जरूर पहुंच जायेगी। संवाद