बाड़ी ब्राह्मणा। गांव रियोर में आग लगने से दो एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। शुक्रवार 4 बजे के करीब बिजली की तारों पर पक्षी बैठने से तारें टकराई गईं। इस कारण तारों से चिंगारी निकली और नीचे गेहूं की फसल पर जा गिरी, जिससे आग भड़क गई। देखते ही देखते दो एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई।
आसपास के लोगों ने आग बुझाने के लिए ट्रैक्टर घुमाना शुरू कर दिया। इस बीच कुछ देर में दमकल गाड़ी पहुंच गई, और उसने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक आग में 2 एकड़ गेहूं की फसल जल चुकी थी। 4 से 5 किसानों की गेहूं की फसल आग की चपेट में आ है। स्थानीय किसानों का कहना है कि बिजली के तार काफी ढीले हैं। इसके लिए बिजली विभाग के अधिकारियों को कई बार सूचित किया, लेकिन उन्होंने इसके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की। नतीजतन लोगों को इसका नुकसान उठाना पड़ा है।
शुभ मुहूर्त शुरू, किसानों की शादी में पटाखे न चलाने की मांग
कहा, इससे कई एकड़ फसल को लग सकती है आग
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। कृषि प्रधान क्षेत्र अरनिया में इस समय गेहूं की फसल पक कर खेतों में तैयार है। वहीं शुभ मुहूर्त शुरू होते ही आग लगने की संभावना बढ़ती जा रही है।
किसानों के अनुसार क्षेत्र में जितने भी बैंकट हाल हैं। वह सभी लगभग खेतों में ही बने हैं, जिससे फसल को आग लगने की आशंका जताई जा रही है। चंगिया के पूर्व सरपंच रघुवीर सिंह, आत्मा राम, रमन कुमार, बाबू राम, रमेश सिंह व भारत भूषण आदि का कहना है कि शुभ महूर्त शुरू हो चुके हैं। आने वाले दिनों में लगातार शादी समारोह होता रहेगा। ऐसे में खास तौर से बरात के समय लोग हवाइयां व अन्य पटाखों का इस्तेमाल न करें। पटाखों से निकलने वाली एक चिंगारी खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को अपनी चपेट में लेकर पल में राख बना सकती है।
वहीं थाना प्रभारी तिलक राज का कहना है कि आदेश मिलते ही इस पर कार्रवाई करके क्षेत्र के सभी बैंकट हाल संचालकों को आदेश की कॉपी जारी कर दी जायेगी।
फोटो
सीमावर्ती क्षेत्र में गेहूं की कटाई शुरू
रामगढ़। क्षेत्र के सीमावर्ती गांव में गेहूं की फसल की कटाई का काम जोरशोर से चल रहा है। रामगढ़ क्षेत्र में इस बार मजदूर कम पहुंचे हैं। ऐसे में किसान कंबाइन मशीन का सहारा ले रहे हैं।
किसान नेता विजय चौधरी, ओमप्रकाश सिंह, भगवान दास, पंच बिल्लू चौधरी, टिंकू चौधरी, रवि कुमार, हैप्पी चौधरी का कहना है कि क्षेत्र में इस बार गेहूं की फसल अच्छी है। इस बार पशुओं के चारे के लिए चारा भी नहीं मिलेगा, जिससे किसानों को चिंता सता रही है। जो भूसा बनाने की मशीनें लगी हैं उनसे भूसा पूरा नहीं किया जा सकेगा।