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जम्मू-कश्मीर: 111 सिम कार्ड से खड़ा किया टेरर फंडिंग का नेटवर्क, 60 बैंक खातों से 70 करोड़ का खेल

Tue, 03 Nov 2026 01:45 PM IST
Nikita Gupta अरुण कुमार, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू में 111 मोबाइल सिम कार्ड से शुरू हुई जांच में जाली दस्तावेजों पर खोले गए 60 से अधिक बैंक खातों के जरिए 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है।
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जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग नेटवर्क - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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जम्मू में 111 सिम कार्ड की बरामदगी से शुरू हुई जांच टेरर फंडिंग के बड़े नेटवर्क तक पहुंच गई है। जाली दस्तावेज के आधार पर खुलवाए गए 60 से अधिक बैंक खातों के जरिये 70 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन किया गया। इन खातों का इस्तेमाल रकम को एक से दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता था। एक दिन में 300 तक ट्रांजेक्शन का पता चला है। इस नेटवर्क का जुड़ाव दुबई, बांग्लादेश के साथ ही पाकिस्तान से भी मिल रहा है।

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ऑनलाइन गेमिंग, हवाला और सट्टेबाजी से जुड़े इस नेटवर्क के जरिये आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और उसे आगे पहुंचाने की अहम कड़ी जांच टीम के हाथ लगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजीपी जम्मू जोन की निगरानी में एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है। विदेश भाग चुके मुख्य आरोपी आकाश आनंद का पासपोर्ट रद्द कराने की तैयारी की जा रही है। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी हो चुका है।

मामला एक अगस्त को सामने आया। जम्मू सिटी पुलिस टीम ने विवेकानंद चौक के पास कार सवार दो लोगों से 111 मोबाइल सिम कार्ड बरामद कर पूछताछ शुरू की। पुलिस ने सिम कार्ड के इस्तेमाल और उनसे जुड़े नेटवर्क की पड़ताल शुरू की।

जांच में सामने आया कि सिम का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग, हवाला और सट्टेबाजी से जुड़ी गतिविधियों में किया जा रहा है। आगे की जांच में जाली दस्तावेज पर बैंक खाते खुलवाने और उनके माध्यम से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क सामने आया।
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अक्तूबर में गिरफ्तार किए गए थे साइबर कैफे संचालक
इस मामले में सिटी पुलिस ने 16 अक्तूबर को साइबर कैफे संचालक अभिनव कुमार और संजय कुमार को गिरफ्तार किया था। उनके ठिकाने से कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए थे। पुलिस को आशंका है कि इन्हीं संसाधनों के जरिये जाली दस्तावेज तैयार कर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। अब जांच का दायरा खाते खुलवाने वालों से लेकर उनका इस्तेमाल करने वाले लोगों और रकम के वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच गया है।
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