गुडविल स्कूल में पढ़ाते सेना के अधिकारी
- फोटो : Amar Ujala
मुश्किल हालात, हिंसा और सरहद पर से पाकिस्तान की तरफ से होने वाली गोलाबारी के बीच कश्मीर से बीते दिनों हिम्मत और जुनून की कुछ ऐसी मिसालें देखने को मिलीं, जिन्होंने ये साबित किया कि बंदिशें सपनों को परवाज भरने से नहीं रोक सकतीं। उस कठिन वक्त में जब सारे कश्मीर से हिंसा के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित था कुछ कश्मीरी बच्चों ने अपनी छोटी सी उम्र में साहस और बेइंतेहां जुनून के बल पर सारी दुनिया में हिन्दुस्तान के हुनर और कश्मीर की तालीम का सिर गर्व से ऊंचा किया।
हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से कश्मीर में हिंसक प्रदर्शनों का खामियाजा सबसे ज्यादा बच्चों की जिंदगी पर पड़ा। घाटी के स्कूल बंद हुए तो स्कूलों के बहाने होने वाली तमाम वो गतिविधियां भी बंद हो गईं जिनसे कश्मीर के बच्चों के हुनर को नया हौसला मिलता था। इन सबके बीच सेना के स्कूलों में तालीम की रोशनी बिखरती रही।
गुडविल स्कूलों में न सिर्फ घाटी के बच्चों की पढ़ाई जारी रही बल्कि सेना के साथ के कारण परीक्षाओं को भी समय से संपन्न कराया जा सका। इसके साथ ही कई बार ऐसा भी हुआ जब सेना के स्कूलों में खुद आला अफसरों ने बच्चों की क्लास ली। एक ओर जहां स्कूलों में सेना ने बच्चों की तालीम को नया हौसला दिया, वहीं दूसरी ओर नन्हे बच्चों को दुनिया के मंच पर चमकने की हिम्मत भी।