लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने सेना के सर्च आपरेशन और मुठभेड़ से बचने के लिए पत्थरबाजों की सेना तैयार कर ली है। आतंकियों के ओवर ग्राउंड वर्करों ने दक्षिणी कश्मीर के अधिकांश गांवों में लड़ाकू टीम बनाई है, जिसमें महिलाओं और बच्चों को भी शामिल किया गया है।
सेना के सर्च आपरेशन के दौरान गांवों में आतंकियों की मौजूदगी का पता लगने के बाद घेराबंदी करते ही पत्थरबाजों की यह सेना सक्रिय हो जाती है। सेना और सुरक्षा बलों पर चौतरफा पत्थरबाजी शुरू हो जाती है, जिसके कारण मुठभेड़ को रोकना पड़ता है। इस स्थिति का फायदा उठाकर आतंकी फरार हो जाते हैं।
कश्मीर घाटी में सर्च आपरेशन और मुठभेड़ के दौरान सेना और सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी की घटनाएं जनवरी और फरवरी में भी हुई थीं, लेकिन तब पत्थरबाज कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित थे। आतंकियों के इस रक्षक दल का विस्तार अब पूरे दक्षिण कश्मीर में हो चुका है। सेना ने दो माह पहले मुठभेड़ से पहले इलाके को सील करने की रणनीति अपनाई थी।
उसके बाद मुठभेड़ के क्रम में पत्थरबाजी की घटनाओं में कुछ कमी आई। उपद्रवी तत्व अब आक्रामक तरीके से सेना के सर्च आपरेशन में बाधा डाल रहे हैं। नतीजतन तीन स्थानों पर सर्च आपरेशन रोकना पड़ा। सेना के सूत्रों के मुताबिक संयम बरतने की नीति के कारण आम नागरिकों पर सीधी कार्रवाई को टाला जा रहा है, जिसका फायदा आतंकियों को मिलता है।
पुलवामा में लश्कर कमांडर अबू दुजाना को पत्थरबाजों द्वारा उपद्रव से बनाई गई दीवार का फायदा मिला और वह पांचवीं बार सुरक्षा बलों का घेरा तोड़कर भागने में सफल रहा। अबू दुजाना सात साल से कश्मीर में सक्रिय है। वह पाकिस्तानी आतंकी है और मुठभेड़ में कश्मीरी आतंकी के मारे जाने के बाद कई स्थानों पर शवों को सैल्यूट देने भी पहुंचता रहा है। आतंकी बुरहान वानी की शव यात्रा में भी वह शामिल था।