जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हो सकती है। जहूर अहमद भट बनाम भारत संघ के इस मामले में इससे पहले पिछले वर्ष 10 अक्तूबर को सुनवाई हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को याचिकाकर्ताओं की दलीलों का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि केंद्र के सॉलिसिटर जनरल ने अदालत की संविधान पीठ के सामने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिए जाने के संबंध में बयान दिया था।
मामले में कोर्ट के एक जज की ओर से पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि विधानसभा चुनाव होने के बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि उमर अब्दुल्ला सरकार की कैबिनेट ने 18 अक्तूबर 2024 को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से राज्य का दर्जा बहाल करने का अनुरोध किया है।
सॉलिसिटर जनरल ने इस पर कहा था कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए हैं और एक चुनी हुई सरकार का गठन हो चुका है। पिछले छह वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर ने काफी प्रगति की है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने से पहले पहलगाम जैसी कुछ हालिया घटनाओं पर भी विचार करना होगा। फिलहाल, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और केंद्र सरकार इस मामले में बातचीत कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलों का जवाब देने के लिए कुछ और समय मांगा था। इस पर पीठ ने उन्हें चार सप्ताह का समय देते हुए मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए थे।